किसान आंदोलन- किसानों को खालिस्तानी कहे जाने पर सरकार पर बरसे बाजवा, कहा- हमें देशभक्ति ना सिखाई जाए…

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New Delhi. नए कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के मुद्दे पर सदन में विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं. विपक्ष कृषि कानून और उसके खिलाफ किसान आंदोलन (Farmers Protest) के मुद्दे पर सरकार को सड़क से लेकर संसद तक घेरने में जुटा है. इसी कड़ी में शुक्रवार को राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने जोरदार भाषण दिया। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। बाजवा खास तौर पर किसानों को खालिस्तानी कहे जाने से बेहद खफा नजर आए। उन्होंने सिख धर्म और सिख गुरुओं की कुर्बानी याद दिलाते हुए कहा कि हमें देशभक्ति ना सिखाई जाए।

बाजवा (MP Pratap Singh Bajwa) ने सेना में सेवाएं दे चुके अपने बड़े भाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘ मेरे बड़े भाई जो भारतीय सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर हैं, वह उनमें से एक थे जिन्होंने टाइगर हिल को जीतने वाली 192 माउंटेन ब्रिगेड का नेतृत्व किया। आप हमें खालिस्तानी कहते हैं? आप कहते हैं ऐंटी नैशनल हैं ये लोग। मेरी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट का एक सिटिंग जज दो महीने के अंदर मामले की जांच करें और यह बताए कि वो कौन सी ताकत है जिसने उस दिन दिल्ली में हिंसा की। भैया यह जो लाल किला जिसकी आप बात करते हो, मुगल राज में स्थापित हुआ है। 300 साल पहले गुरु तेगबहादुर जी की कुर्बानी के बाद गुरुगोविंद सिंह महाराज के दो बड़े साहबजादे शहीद हुए। छोटे साहबजादों को जिंदा दीवार में चुन दिया गया। गुरु गोविंद नहीं होते तो इस देश की शक्ल कुछ और होती। आप हमें कह रहे हो?’

कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा (MP Pratap Singh Bajwa) ने राज्यसभा में पंजाबी में बोलते हुए कहा कि जिस वक्त इस कानून को लेकर इस सदन में चर्चा हो रही थी तभी मैंने कहा था कि किसानों के लिए यह डेथ वॉरंट होगा, लेकिन सरकार ने हमारी बात नहीं मानी.

कांग्रेस के सासंद प्रताप सिंह बाजवा (MP Pratap Singh Bajwa) ने कहा कि जिस समय सितम्बर में तीन कृषि कानून (Farm Laws) पर राज्यसभा में चर्चा हो रही थी तभी मैंने ये कहा था कि किसानों के लिए डेथ वारंट है और वो कभी नहीं मानेगा. हमने वोटिंग की मांग की थीं लेकिन, सरकार नहीं मानी. बड़े कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए धोखे से सरकार ने कानून पास करवा लिया. बाजवा ने 12 सांसदों के गाजीपुर बॉर्डर पर जाने की अनुमति ना दिए जाने का मुद्दा भी उठाया.

संसद में कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) करीब 11.30 बजे राज्यसभा में अपनी बात रखेंगे. वह किसान आंदोलन पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करेंगे. तीनों कृषि कानून पर विपक्ष के नेताओं द्वारा सरकार पर ताबड़तोड़ हमले के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सरकार ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को जवाब देने के लिए मैदान में उतारने का फैसला किया.

नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात करने जा रहे विपक्षी दलों के सांसदों को पुलिस ने गुरुवार को गाजीपुर बॉर्डर पर जाने से रोक दिया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने सरकार पर निशाना साधते हुए गुरुवार को ट्वीट में लिखा, “अकाली दल, समान विचारधारा रखने वाली पार्टियों और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों से मिलने जा रहे सांसदों के साथ किसानों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा करता है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों से सांसदों तक को मिलने नहीं दिया जा रहा है. यह वास्तव में लोकतंत्र के लिए काला दिन है!

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