मोदी-योगी के आदेशों को नजरअंदाज कर सरकार की किरकिरी करवाने में जुटे विभागीय अफसर…

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  • शासनादेश के बाद भी परफारमेंस सिक्योरिटी में नहीं मिल रही छूट
  • अफसरों की मनमानी के चलते ठहरे विकास को नहीं मिल पा रही गति

लखनऊ. (फर्स्ट आई न्यूज ब्यूरो) केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्यों को गति देने वाले एक शासनादेश का दो माह बाद भी विभागों द्वारा अनुपालन न किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। 29 दिसंबर 2020 को जारी इस शासनादेश को वर्ष 2022 तक प्रभावी माना गया है। लेकिन यूपी सरकार द्वारा जारी किए गए इस शासनादेश का सरकारी विभागों द्वारा अनुपालन नहीं हो रहा है। जबकि केन्द्र सरकार के अधीन सभी विभागों में इस शासनादेश का अनुपालन तत्काल प्रभाव से 03 माह पूर्व ही लागू हो गया है।

केन्द्र सरकार के निर्देश पर वित्त मंत्रालय के सचिव (व्यय विभाग) टी0वी0 सोमनाथन ने 12 नवम्बर 2020  को प्रदेश सरकार को लिखे गए पत्र में मुख्य सचिव को दिए गए निर्देश में परफारमेंस सिक्योरिटी 5 से 10% तक जमा कराने में छूट प्रदान करते हुए इसे 3 फीसदी ही करने की स्पष्ट हिदायत देते हुए इसको निर्माण कार्य से जुड़े विभागों में शासनादेश के माध्यम से लागू करने को कहा था।

इस शासनादेश का मकसद कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रहे ठेकेदारों को एडिशनल सिक्योरिटी में छूट प्रदान कर निर्माण कार्यों को बढ़ावा देना था।

केन्द्र सरकार के इस अति महत्वपूर्ण निर्देश का संज्ञान लेते हुए संयुक्त सचिव संजय कुमार मिश्र उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ ने 29 दिसंबर 2020 को समस्त अपर मुख्य सचिव/सचिव को सम्बोधित शासनादेश जारी कर तत्काल सरकारी विभागों में पंजीकृत ठेकेदारों को यह छूट प्रदान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

श्री मिश्र ने सचिव वित्त मंत्रालय के अर्द्धशासकीय पत्र सं0 9/4/2022 दिनांक 10 नवंबर 2020 का अवलोकन करते हुए इस नई व्यवस्था को लागू कर अतिरिक्त परफारमेंस सिक्योरिटी/ परफारमेंस सिक्योरिटी/बिट सिक्योरिटी/अर्नेस्ट मनी डिपाजिट में सिर्फ 3 फीसदी राशि ही सरकारी विभागों द्वारा ठेकेदारों से जमा कराये जाने का निर्देश दिया था। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा शासनादेश जारी करने के दो माह बाद भी विभागों द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर केन्द्र सरकार के अधीन रेल, पी0डब्ल्यू0डी0,  एन0एच0ई0आई0 सहित निर्माण कार्य करने वाले सभी विभागों में इस शासनादेश के तहत पिछले कई महीनों से कार्य हो रहे हैं।

गौरतलब यह है कि यूपी की भाजपा सरकार अपने ही शासनादेश का अनुपालन नहीं करा पा रही है। केन्द्र सरकार का यह निर्देश अफसरों की मनमानी का शिकार हो गया है। इसका असर विकास कार्यों में प्रतिकूल दिख रहा है। सरकारों की मंशा थी, कि परफारमेंस सिक्योरिटी में रियायत देकर कोरोना काल में ठहरे विकास को नई गति दी जाए। लेकिन यूपी में अफसरों की मनमानी के चलते यह सकारात्मक प्रयास ठंडे बस्ते में बंद हो गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों द्वारा कई कई बार टेंडर निकाले जाते हैं, उनकी तिथियां बढ़ाई जाती है। इसके बाद भी ठेकेदार सहभागिता नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह परफारमेंस सिक्योरिटी के साथ ही शासन द्वारा समय से वित्तीय स्वीकृतियों का न हो पाना है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी ठहरे विकास को गति नहीं मिल पा रही है।

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