Kisan Andolan: किसानों के चक्का जाम का राज्य में नहीं दिखा असर, तो विपक्षी पार्टियों ने बताई ये बड़ी वजह…

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पटना. नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा देशभर में किए गए तीन घंटे के चक्का जाम का असर बिहार में नहीं दिखा। विपक्षी पार्टियों ने इसकी वजह बताई कि बिहार में इंटरमीडिएट की परीक्षा चल रही है और वे नहीं चाहते कि चक्का जाम का असर परीक्षार्थियों पर किसी भी तरह से पड़े। पहले राजद और भाकपा माले जैसी पार्टियों ने आधा-एक घंटे चक्का जाम की बात कही थी लेकिन बाद में इन पार्टियों ने तय किया कि वह बंद को सिर्फ नैतिक समर्थन देंगी।

विपक्षी पार्टियों ने इसकी वजह बताई कि बिहार में इंटरमीडिएट की परीक्षा चल रही है और वे नहीं चाहते कि चक्का जाम का असर परीक्षार्थियों पर किसी भी तरह से पड़े। हालांकि राज्य में कई जगहों पर कुछ देर के लिए NH, SH और कुछ प्रमुख सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान जाम किया गया। पटना सिटी के टोल प्लाजा के पास NH को प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर के लिए जाम कर दिया, हालांकि इससे इंटर परीक्षार्थियों को कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि उससे 5 घंटे पहले परीक्षा शुरू हो चुकी थी।

पटना शहर में किसी तरह का चक्का जाम नहीं किया गया। यहां भारत बंद या बिहार बंद के दौरान हो-हंगामे वाली जगह डाकबंगला चौराहा भी शांत रहा। पटना के ​​​​​​ग्रामीण इलाके ​नौबतपुर में NH 139 पर राजद, CPI और CPI ML के कार्यकर्ताओं ने लगभग एक घंटे तक सड़क जाम रखा। उधर, आरा में जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरा-बक्सर मुख्य मार्ग को चंदवा मोड़ के पास जाम कर दिया।

पूरे बिहार में लगभग 14 लाख स्टूडेंट इंटर की परीक्षा दे रहे हैं। चक्का जाम प्रभावशाली तरीके से किया जाता तो परीक्षार्थियों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता। विपक्ष लगातार युवाओं की समस्याओं से जुड़े सवाल उठा रहा है और उन सवालों पर सरकार को घेरता रहा है। युवाओं को रोजगार देने के साथ समय से परीक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सवाल इसमें अहम है। विपक्ष नहीं चाहता था कि चक्का जाम की वजह से सत्ता पक्ष को सवाल उठाने का कोई मौका मिल पाए। इसलिए विपक्षी पार्टियां रणनीति में बदलाव करते हुए चक्का जाम के समर्थन से नैतिक समर्थन पर आ गईं।

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