प्रयागराज- मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, प्रशासन भी अलर्ट

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धर्म डेस्क. मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) का पर्व कल संगम नगरी प्रयागराज में भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. इस पर्व पर माघ मेले में तकरीबन लाखों लोगों संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। कोविड 19 के इस दौर में शासन प्रशासन की तरफ से व्यापक पैमाने पर तैयारी की गई है। इस बार मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) पर पूण्य की डुबकी के लिए आठ घाट बनाये गए हैं। जिनकी लंबाई तकरीबन साढ़े आठ हजार फीट है। मेले में एक दिन पहले से ही भीड़ जुटने लगी है। इस पर्व पर 10 से 15 लाख लोगो के स्नान करने की उम्मीद है।

कल्पवासियों का कोविड टेस्ट अनिवार्य

संगत तट पर हर वर्ष लगने वाले माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्वों को मिलाकर करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। तकरीबन पांच लाख कल्पवासी और साधु संत यहां परमानेंट एक महीने तक रहते हैं। कोरोना काल में इस क्राउड को नियंत्रित करना और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित घर वापस भेजना मेला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इस बार माघ मेला Covid-19 गाइडलाइन के अनुसार कराया जा रहा है जिसको लेकर श्रद्धालुओं, कल्पवासियों और साधु-संतों को कोविड की निगेटिव जांच रिपोर्ट के आने के बाद मेला में प्रवेश मिलेगा। उन्हें अधिकतम तीन दिन पुरानी आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लानी अनिवार्य होगी। जो की पहली बार हो रहा है।

संक्रमित मिलने के बाद पूरे शिविर के लोग होंगे आईसोलेट

मेले में आने वाले कल्पवासियों का डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। 15-15 दिनों में दो बार रैपिड एंटीजेन किट से हर कल्पवासी की कोविड जांच भी कराई जाएगी। इसके अलावा शिविर में अगर एक भी श्रद्धालुओं की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो सभी लोगों को 15 दिन के लिए आइसोलेट भी किया जाएगा। इस बार Covid-19 को देखते हुए मेले में अधिक भीड़.भाड़ न होए इसलिए मेले में जरुरी दुकानों को छोड़कर बाकी दुकानों पर पाबंदी रहेगी।
प्रमुख स्नान पर्व

11 फरवरी को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya)।

16 फरवरी को बसंत पंचमी।

27 फरवरी को माघी पूर्णिमा।

11 मार्च को महाशिवरात्रि के माघ मेले का समापन।

मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) पर कोविड-19 प्रोटोकॉल को देखते हुए माघ मेले के तीसरे और सबसे बड़े स्नान पर्व पर मौन डुबकी के लिए इस बार 8000 फुट लंबे घाट बनाए गए हैं, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके। इसके लिए गंगा के दोनों तटों पर बने स्नान घाटों पर सर्कुलेटिंग एरिया भी बढ़ा दिया गया है। इसमें संगम नोज पर स्नानार्थियों की सुविधा के लिए लगभग 650 फुट और काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग के अलावा खाक चौक में बने घाटों पर औसतन 300 फुट चौड़ी सर्कुलेटिंग एरिया की बना दी गई है।

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