लोकसभा में बोले PM मोदी- कृषि कानून लागू होने के बाद ना कही मंडी बंद हुई ना कही MSP, विपक्ष भ्रम फैला रहा है…

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PM Modi said in the Lok Sabha
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नई दिल्ली. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बुधवार को कृषि कानूनों (Farm laws)और कोरोना महामारी (Corona Pandemic)के मुद्दे पर अपनी बात साफगाई से रखी और इस मुद्दे पर विपक्ष खासकर कांग्रेस पर निशाना साधा.

लोकसभा में बोले PM मोदी…

– राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ भारतीयों की संकल्प शक्ति को प्रदर्शित करता है. विकट और विपरीत काल में भी ये देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर चलते हुए सफलता प्राप्त करता है, ये सब राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कही.

– मैं इस चर्चा में भाग लेने वाले सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं. मैं विशेष रूप से हमारी महिला सांसदों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं.

– देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वो आखिरी तक यही कहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा. लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा. विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं.

– कुछ लोग ये कहते थे कि India was a miracle democracy. ये भ्रम भी हमने तोड़ा है. लोकतंत्र हमारी रगों और सांस में बुना हुआ है, हमारी हर सोच, हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा हुआ रहता है.

– आज जब हम भारत की बात करते हैं तो मैं स्वामी विवेकानंद जी की बात का स्मरण करना चाहूंगा. “हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है, हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है, हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे वो प्राप्त करता है.”

– जिन संस्कारों को लेकर हम पले-बढ़े हैं, वो हैं- सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया. कोरोना कालखंड में भारत ने ये करके दिखाया है.

– हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत के विचार को बल दें. ये किसी शासन व्यवस्था या किसी राजनेता का विचार नहीं है.

– आज हिंदुस्तान के हर कोने में वोकल फ़ॉर लोकल सुनाई दे रहा है. ये आत्मगौरव का भाव आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है.

– हमारे लिए संतोष और गर्व का विषय है कि कोरोना (Corona Pandemic) के कारण कितनी बड़ी मुसीबत आएगी इसके जो अनुमान लगाए गए थे कि भारत कैसे इस स्थिति से निपटेगा. ऐसे मैं ये 130 करोड़ देशवासियों के अनुशासन और समर्पण ने हमें आज बचा कर रखा है.

-कोरोना के बाद भारत के लिए भय का वातावरण बनाया गया था. भारत कैसे टिक पाएगा, अगर भारत में एक बार हालत खराब हो गई तो विश्व को कोई नहीं बचा पाएगा, ऐसे भी कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ये 130 करोड़ देशवासियों के समर्पण से ही हुआ है.

-हम कोरोना से जीत पाए, क्योंकि डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी, एम्बुलेंस का ड्राइवर ये सब भगवान के रूप में आए. हम उनकी जितनी प्रशंसा करें, जितना गौरवगान करेंगे, उससे हमारे भीतर भी नई आशा पैदा होगी.

– कोरोना कालखंड में जनधन खाते, आधार, ये सभी गरीब के काम आए. लेकिन कभी-कभी सोचते हैं कि आधार को रोकने के लिए कौन लोग सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे में गए थे?

-इस कालखंड में भी हमने रिफॉर्म का सिलसिला जारी रखा है. हम इस इरादे से चले है कि भारत की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए हमें नए कदम उठान होंगे. और हमने पहले दिन से ही कई कदम उठाए हैं.

-कानून लागू होने के बाद ना कही मंडी बंद हुई है और ना कही एमएसपी बंद हुई है.
-कोरोना काल मे सरकार की ओर से उठाए गए कदम से देश का विकास दो डिजिट का होने वाला है.

-कांग्रेस ने कृषि कानूनों के ‘कलर’ पर चर्चा की, ‘कंटेंट’ पर करते तो अच्छा होता.

-आंदोलन कर रहे सभी किसान की भावनाओं का सदन आदर करता है, इसीलिए सरकार लगातार आदर भाव के साथ बात कर रही है. लगातार बातचीत होती रही है. किसानों की शंकाएं पर चर्चा कर रहे हैं, कुछ कमी है तो बदलने को तैयार हैं.

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