प्रभु राम के सांस्कृतिक राज्य के तौर पर विकसित की जाएगी अयोध्या, अब तक 1900 करोड़ रुपए ट्रस्ट के खाते में आये

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अयोध्या. अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण (Ram Temple Construction) के लिये चलाये जा रहे निधि समर्पण अभियान कल यानी 27 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। निधि समर्पण अभियान के द्वारा अब तक 1900 करोड़ रुपए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास आ चुका है।

सांस्कृतिक राज्य के तौर पर विकसित की जाएगी अयोध्या

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने की। कमिश्नर की टीम ने विकास की जो तस्वीर पेश की वह बेहद सुखद रही है। इसमें प्रभु राम के सांस्कृतिक राज्य की तस्वीर दिखाई देखी। अयोध्या के संपूर्ण परिसर की जो योजना योगी सरकार ने तैयार की है, उसमें एयरपोर्ट से लेकर गरीबी कैसे दूर की जाए? साफ- सफाई व निराश्रित महिलाओं के पुनर्वास तक की योजनाओं को शामिल किया गया है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय राय ने कहा राम मंदिर से ताल मेल बना कर ही अयोध्या का विकास कैसे किया जाए इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से प्रस्तावित विकास योजनाओं पर चर्चा की गई है। सिर्फ 70 एकड़ में मंदिर नहीं बनेगा, आसपास इलाके का भी विकास होगा। ताकि कोई भी यात्री आए तो वह दो-तीन ठहरकर यहां भ्रमण करे।

आधुनिकता के साथ प्राचीन शैली का होगा समावेश

स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि 27 फरवरी को समाप्त। होने वाला राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहा निधि संग्रह अभियान पूरे देश में सफलतापूर्वक चला जो बेहद सफल रहा है। इस अभियान में अब तक 1900 करोड़ राशि जमा हो चुकी है। धनसंग्रह का पूरा विवरण अभियान के समापन के बाद कर जारी किया जाएगा।

60 फीसदी नींव की खोदाई का काम पूरा

ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर की नींव की खोदाई का काम 60 फीसदी पूरा हो गया है। बाकी 40 फीसदी का काम भी मार्च में पूरा हो जाएगा। उसी के बाद नींव में मैटेरियल की भराई का काम शुरू हो जाएगा। अब तक 12 मीटर तक की नींव की खोदाई हो चुकी है। जिसमें मजबूत मिट्टी की सतह मिली है। मंदिर निर्माण में कार्यरत इंजीनियरिंग कंपनियां व IIT चेन्नई के विज्ञानी नींव की डिजाइन तैयार कर इसका प्रजेंटेशन दे रहे हैं। अब इसको अंतिम रूप देना है कि इसमें मलबा हटाने के बाद किस तरह का मजबूत मैटेरियल भरा जाए। इसमें मिर्जापुर के पत्थ रों का इस्तेमाल किया जाएगा।

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