महाराष्ट्र: CM ठाकरे के मस्जिद संबंधी बयान पर भड़के आजमी, कहा- सभी मु्स्लिम मंत्री इस्तीफा दें…

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Mumbai. महाराष्ट्र विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उस वक्त हंगामा मच गया जब सीएम उद्धव ठाकरे ने बाबरी मस्जिद गिराने पर शिवसेना को अभिमान की बात की। जिसके बाद सरकार के घटक दल सपा के विधायक अबू आजमी इस पर भड़क गए, और उन्होने सीएम ठाकरे के बयान की आलोचना करते हुए सभी मुस्लिम मंत्रियों से इस्तीफा देने की मांग कर दी। बता दें, ठाकरे सरकार में असलम शेख (कांग्रेस), नवाब मलिक और हसन मुश्रीफ (एनसीपी) कैबिनेट मंत्री हैं। अब्दुल सत्तार (शिवसेना) राज्य मंत्री हैं।

विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए बुधवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, ‘जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई, तब सब लोग भाग गए थे… लेकिन बाला साहेब खड़े रहे थे। शिवसेना प्रमुख (बाल ठाकरे) ने तब कहा था कि अगर उनके शिवसैनिकों ने मस्जिद के कुछ हिस्से ढहाए हैं, तो उन्हें इस पर गर्व है।

अबू आजमी ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उन्हें नहीं यह भूलना चाहिए कि महाराष्ट्र में सिर्फ शिवसेना की सरकार नहीं है। आजमी की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साथ ली है। हालांकि मुंबई में कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुख्यमंत्री के इस बयान पर सवाल उठाए हैं।

आजमी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री को ध्यान रखना चाहिए कि महाराष्ट्र की सरकार एक सेक्यूलर सरकार है, सिर्फ शिवसेना की सरकार नहीं हैं। इसीलिए यहां हिंदु-मुस्लिम की बात नहीं होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद का विध्वंस को एक आपराधिक कृत्य कहा था। आजमी ने कांग्रेस और एनसीपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन दलों ने अतीत में मुसलमानों को शिक्षा और नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी, लेकिन अब तक नहीं दिया।

कम से कम मुस्लिम मंत्रियों को तो शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए और ठाकरे के बयान और आरक्षण के मुद्दे पर उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’ सपा नेता ने कहा कि राज्य की महाविकास अघाडी सरकार बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए बनी थी और कांग्रेस तथा एनसीपी ने उसे न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर सहमति के आधार पर समर्थन दिया था।

कांग्रेस ने कहा, नो कॉमेंट्स

आजमी के मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे मांगने के बयान पर कांग्रेस के नेता खामोश रहे। विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार किया। दूसरी ओर, कांग्रेस कोटे के मंत्री असलम शेख भी इस पर चुप रहे। वह ‘नो कॉमेंट्स बोलकर आगे बढ़ गए। दूसरी ओर, मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम ने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए सवाल किया कि उनका बयान किस न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा था?

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