कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जरिए पूरी दुनिया से करोड़ों बौद्ध अनुयायियों को यहाँ आने का अवसर मिलेगा: PM Modi

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कुशीनगर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मन्दिर परिसर में अभिधम्म दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध आज भी भारत के संविधान की प्रेरणा हैं। बुद्ध का धर्मचक्र भारत के तिरंगे पर विराजमान होकर हमें गति दे रहा है। आज भी संसद में कोई जाता है तो ‘धर्म चक्र प्रवर्तनाय’ मंत्र पर उसकी नजर जरूर पर पड़ती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आश्विन महीने की पूर्णिमा का यह पवित्र दिन, कुशीनगर की पवित्र भूमि, और अपने रेलिक्स, के रूप में भगवान बुद्ध की साक्षात् उपस्थिति! भगवान बुद्ध की कृपा से आज के दिन कई अलौकिक संगत, कई अलौकिक संयोग एक साथ प्रकट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जरिए पूरी दुनिया से करोड़ों बौद्ध अनुयायियों को यहाँ आने का अवसर मिलेगा, उनकी यात्रा आसान होगी। इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर श्रीलंका से पहुंची पहली फ्लाइट से अति-पूजनीय महासंघ, सम्मानित भिक्षुओं, हमारे साथियों ने, कुशीनगर में पदार्पण किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में जहां-जहां बुद्ध के विचारों को सही मायने में आत्मसात किया गया है, वहाँ कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी प्रगति के रास्ते बने हैं। बुद्ध इसीलिए ही वैश्विक हैं, क्योंकि बुद्ध अपने भीतर से शुरुआत करने के लिए कहते हैं। भगवान बुद्ध का बुद्धत्व है- सेंस ऑफ अल्टीमेट रिस्पांसिबिलिटी अर्थात-हमारे आसपास, हमारे ब्रह्मांड में जो कुछ भी हो रहा है, हम उसे खुद से जोड़कर देखते हैं, उसकी जिम्मेदारी खुद लेते हैं, जो घटित हो रहा है उसमें अगर हम अपना सकारात्मक प्रयास जोड़ेंगे, तो हम सृजन को गति देंगे। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, क्लाइमेट चेंज की चिंता जाहिर करती है, तो उसके साथ अनेक सवाल उठ खड़े होते हैं। लेकिन, अगर हम बुद्ध के सन्देश को अपना लेते हैं तो ‘किसको करना है’, इसकी जगह ‘क्या करना है’, इसका मार्ग अपने आप दिखने लगता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इस अमृत महोत्सव में हम अपने भविष्य के लिए, मानवता के भविष्य के लिए संकल्प ले रहे हैं। हमारे इन अमृत संकल्पों के केंद्र में भगवान बुद्ध का वो सन्देश है जो कहता है ‘अप्पमादो अमतपदं, पमादो मच्चुनो पदं। अप्पमत्ता न मीयन्ति, ये पमत्ता यथा मता।’ अर्थात, प्रमाद न करना अमृत पद है, और प्रमाद ही मृत्यु है। इसलिए, आज भारत नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है, पूरे विश्व को साथ लेकर आगे चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एक और महत्वपूर्ण अवसर है-भगवान बुद्ध के तुषिता से वापस धरती पर आने का! इसीलिए, आश्विन पूर्णिमा को आज हमारे भिक्षुगण अपने तीन महीने का ‘वर्षावास’ भी पूरा करते हैं। वर्षावास पूरा करने के उपरांत भिक्षुओं को चीवर दान किया जाता है। भगवान बुद्ध का यह बोध अद्भुत है, जिसने ऐसी परम्पराओं को जन्म दिया! बरसात के महीनों में हमारी प्रकृति, हमारे आस पास के पेड़-पौधे, नया जीवन ले रहे होते हैं। जीव-मात्र के प्रति अहिंसा का संकल्प और पौधों में भी परमात्मा देखने का भाव, बुद्ध का ये संदेश इतना जीवंत है कि आज भी हमारे भिक्षु उसे वैसे ही जी रहे हैं। ये वर्षावास न केवल बाहर की प्रकृति को प्रस्फुटित करता है, बल्कि हमारे अंदर की प्रकृति को भी संशोधित करने का अवसर देता है।

इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भगवान बुद्ध की मैत्री और करुणा का संदेश देता रहा है। आज एयर कनेक्टिविटी के माध्यम से श्रीलंका से पहुंची पहली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान ने भगवान बुद्ध की मैत्री और करुणा के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पुनः स्थापित करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री ने नये संकल्पों के साथ आगे बढ़ाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रदेशवासियों की तरफ से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा की ऐसी मान्यता है कि आज ही के दिन संकिसा में भगवान बुद्ध का विशेष अवतरण हुआ था।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी, केन्द्र सरकार के मंत्रिगण, श्रीलंका सरकार में कैबिनेट मंत्रीनमल राजपक्षा, म्यांमार, वियतनाम, कंबोडिया, थाइलैंड, लाओस, भूटान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, मंगोलिया, जापान, सिंगापुर तथा नेपाल सहित कई देशों के वरिष्ठ राजनयिक एवं विशिष्ट अतिथिगण मौजूद थे।

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