Sant Ravidas Birth Anniversary: वाराणसी के संत रविदास मंदिर में लग रही है नेताओं की भीड़, जानें क्या है असली वजह?

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Lucknow. संत रविदास के 644वीं जयंती (Sant Ravidas Birth Anniversary) पर शनिवार को यूपी के वाराणसी में बड़ी सियासत देखने को मिली। केंद्रीय धर्मेंद्र प्रधान और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सीर गोवर्धन मंदिर जाकर रविदास के दर्शन किये और फर्श पर बैठकर प्रसाद खाया। बताया जा रहा है सपा मुखिया अखिलेश यादव भी थोड़ी देर में पहुंचने वाले हैं।

संत रविदास (Saint Ravidas) दलितों के एकलौते भगवान है. जहां भी दलितों के मंदिर होंगे वहां भगवान के तौर पर संत रविदास की ही मूर्ति स्थापित मिलेगी. आज माघ पूर्णिमा के दिन उनकी जयंती है.

नेताओं का संत रविदास के प्रति ये समर्पण आखिर क्यों?

रविदास के मंदिर आज के तो हैं नहीं. फिर पिछले कुछ समय में ही नेताओं के इतने चक्कर ऐसे मंदिरों में क्यों लग रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता मंदिर पहुंचे. अखिलेश यादव जाने वाले हैं लेकिन, कोई नहीं पहुंचा तो वो नेता जो रविदास पर सबसे ज्यादा हक जताती रही हैं. यानी मायावती. मंदिर में नेताओं की भीड़ को देखकर ही मायावती ने रविदास जयंती के संदेश को याद दिलाते हुए ट्वीट किया है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा.

माना जा रहा है, नये दलित समाज में मायावती को लेकर कोई आशा नहीं दिखायी दे रही है. इस भावना को बाकी पार्टियां भी समझ रही हैं. इसीलिए मायावती के पीछे खड़ी होनी वाली जमात को सभी झटकना चाहते हैं. यूपी में अगले साल होने जा रहे विधानसभा के चुनाव में दलित वोट बैंक पर सभी की नजरें हैं.

यदि दलित समाज में बसपा की शून्यता बढ़ती जा रही है तो कोई न कोई तो उसे भरेगा ही. ऐसे में बाकी पार्टियां अपने आप को दलित समाज के सामने विकल्प के तौर पर पेश कर रही हैं. यही वजह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने दूसरी पार्टियों के नेताओं के रविदास मंदिर जाने पर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस, भाजपा और दूसरी पार्टियों ने तो हमेशा से ही दलित समाज के संतों की उपेक्षा की है लेकिन, अब राजनीतिक लाभ लेने के लिए नाटकबाजी कर रही हैं.

 

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