सीएम योगी आदित्‍यनाथ के लिए आसान नही है विधान सभा 2022 का चुनाव

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               1985 के बाद कोई भी नेता नहीं बन सका यूपी में दो बार मुख्‍यमंत्री

फर्स्ट आई न्यूज डेस्क:

उत्‍तर प्रदेश विधानसभ चुनाव 2022 का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक, राज्‍य में 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच 7 चरणों में मतदान संपन्‍न होगा और 10 मार्च को चुनाव नतीजे आएंगे। ये नतीजे बीजेपी के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं, क्‍योंकि इस समय बीजेपी के लिए उत्‍तर प्रदेश ही हिंदुत्‍व की सबसे बड़ी लैबोरेट्री के तौर पर उभरता दिख रहा है। 2014 लोकसभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर में यूपी क्‍लीन स्‍वीप करने के बाद 2017 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को यूपी ने अभूतपूर्व बहुमत दिया। इसके बाद 2019 लोकसभा चुनाव आए और तब सपा-बसपा गठबंधन करके मैदान में उतरे। उस वक्‍त ये माना गया कि अब बीजेपी के लिए यूपी का किला फतह करना करीब-करीब नामुमकिन है, लेकिन 2019 चुनाव में भी बीजेपी ने 62 लोकसभा सीटें जीतकर सारे अनुमानों को फेल कर दिया। चुनौती यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भी कड़ी है। सारे चुनावी समीकरण एक तरफ रखकर अगर कुछ मिथकों की बात करें तो कम से कम इनके आधार पर सीएम योगी आदित्‍यनाथ की राह बिल्‍कुल भी आसान नजर नहीं आ रही है। हां, अगर ये दो मिथक तोड़ने में वह कामयाब रहे तो यूपी राजनीति में ये कारनामा किसी अजूबे से कम नहीं कहलाएगा।

सीएम योगी खा चुके हैं उस रिकॉर्ड को तोड़ने की कसम जो 85 के बाद से टूटा नहीं

सीएम योगी आदित्‍यनाथ 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 350 सीटें दिलाने का दावा कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इतनी सीटें बीजेपी को विकास और राष्‍ट्रवाद के नाम पर मिलने जा रही हैं। टाइम्‍स नाउ नवभारत के कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने उस मिथक को भी तोड़ने की बात कही, जो यूपी में 1985 से बदला नहीं है। सीएम योगी ने कहा, ‘मैं कमबैक करूंगा, मैं उस रिकॉर्ड को तोड़ूंगा।’ पिछले 37 साल से उत्‍तर प्रदेश में कोई भी नेता लगातार दो बार सीएम पद पर नहीं रह सका है।

1985 के बाद से यूपी में कोई भी नेता नहीं बन सका लगातार दो बार मुख्‍यमंत्री

साल 1989 में मुलायम सिंह यादव यूपी के सीएम बने, जिनके बाद 1991-92 में कल्‍याण सिंह ने मुख्‍यमंत्री पद ग्रहण किया। इसके बाद 1993-95 में दोबारा मुलायम सिंह यादव ने सीएम पद की कमान संभाली, लेकिन वह ज्‍यादा दिन सीएम पद पर नहीं रह सके और 95 में ही मायावती पहली बार राज्‍य की मुख्‍यमंत्री बनीं। 96 में यूपी के अंदर राष्‍ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद 97 में मायावती दोबारा सीएम बनीं, लेकिन वह कुर्सी पर टिक नहीं सकीं और 1997-1999 में कल्‍याण सिंह मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो गए। इसके बाद 199-200 में राम प्रकाश गुप्‍ता सीएम बने, 2000-2002 में राजनाथ सिंह ने कमान संभाली। कुछ समय बाद ही 2002 में राष्‍ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। 2002-2003 में यूपी के सीएम कुर्सी मायावती के पास चली गई। 2003-2007 तक मुलायम सिंह यादव ने सीएम पद संभाला और लेकिन 2007 में मायावती ने बड़ा खेल कर दिया और पूर्ण बहुमत के साथ उन्‍होंने सत्‍ता  वापसी की। मायावती 2012 यूपी विधनसभा में हार गईं और इस बार मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश के सिर पर सीएम का ताज पहना दिया, लेकिन अगले चुनाव में वह भी नहीं जीत पाए और 2017 का चुनाव बुरी तरह हार गए। 2017 में योगी आदित्‍यनाथ सीएम बने और 2022 में उनका क्‍या होगा? क्‍या वह लगातार दो बार सीएम बनने का कारनामा करने में सफल रहेंगे या इस बार भी यह रिकॉर्ड नहीं टूट पाएगा, यह तो वक्‍त ही बताएगा।

नोएडा जाने पर सबसे पहले वीर बहादुर सिंह के हाथ से गई कुर्सी

यूपी की सियासत में पिछले तीन दशक से एक और मिथक बना हुआ है और वो यह है कि जो भी सीएम नोएडा आता है उसकी कुर्सी चली जाती है। यह मिथक यूपी में 1988 से बना हुआ है, जब पहली बार तत्‍कालीन सीएम वीर बहादुर सिंह नोएडा आए और अगला चुनाव हार गए। उनके बाद नारायण दत्‍त तिवारी सीएम बने और 1989 में नोएडा के सेक्‍टर 12 में नेहरू पार्क उद्घाटन करने आए। नोएडा आने के कुछ समय बाद तिवारी की कुर्सी चली गई। इसके बाद कल्‍याण सिंह और मुलायम सिंह यादव के साथ भी ऐसा ही हुआ कि वे नोएडा आए और हाथ से सीएम पद चला गया।

योगी आदित्‍यनाथ भी आ चुके हैं नोएडा, क्‍या तोड़ पाएंगे तीन दशक पुराना मिथक

नोएडा आने को लेकर यूपी के मुख्‍यमंत्रियों में कितना खौफ बैठ गया था, इसका अंदाजा साल 2000 की एक घटना से लगाया जा सकता है। उस वक्‍त राजनाथ सिंह सीएम की कुर्सी पर विराजमान थे। उन्‍हें डीएनडी फ्लाई ओवर उद्घाटन करना था। राजनाथ सिंह ने इसका उद्घाटन करने नोएडा की जगह दिल्‍ली से कर दिया था। हालांकि, वह नोएडा नहीं आने के बाद भी ज्‍यादा दिन सीएम नहीं रहे। 2011 में मायावती ने नोएडा आने की हिम्‍मत की और 2012 के चुनाव में वह हार गईं। सीएम बनने के बाद कुछ समय तक योगी आदित्‍यनाथ भी नोएडा नहीं आए थे, लेकिन कालकाजी मेट्रो लाइन के उद्घाटन के मौके पर वह नोएडा आए। उस समय पीएम नरेंद्र मोदी ने इसके लिए सीएम योगी की तारीफ भी की थी।

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