यूक्रेन से फंसे भारतीय छात्रों को निकालना शुरू, बॉर्डर की ओर जाने का प्रयास कर रहे छात्रों पर यूक्रेन आर्मी ने तान दी थी बंदूक

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फर्स्ट आई न्यूज डेस्कः

नई दिल्ली: यूक्रेन में रूस की बमबारी के बीच ऑपरेशन गंगा शुरू करके भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय छात्रों को निकालना शुरू कर दिया है। अभी भी हजारों भारतीय छात्र यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे हैं और घर वापसी की जद्दोजहद में लगे हैं। बॉर्डर की ओर जाने का प्रयास कर रहे छात्रों पर यूक्रेन आर्मी ने बंदूक तक तान दी थी। बिहार का एक युवक पैदल ही पोलैंड के लिए निकल गया है। यूक्रेन में फंसे भारतीयों से बात की…

भारी बमबारी के बीच रेलवे स्टेशन गए, ट्रेन में नहीं बैठाया तो वापस आते वक्त आर्मी ने घेरा

राजस्थान के सीकर की रहने वाली स्टूडेंट डॉ. श्रृद्धा चौधरी ने बताया कि एम्बेसी ने हमसे कहा कि रेलवे स्टेशन पर जाएं। करीब 300 बच्चे कीव के रेलवे स्टेशन गए। 60 बच्चे तो किसी तरह यूक्रेन के वेस्टर्न हिस्से में पहुंच गए, लेकिन कई लोगों को ट्रेन में नहीं बैठाया गया। जब स्टूडेंट्स को ट्रेन नहीं मिली और वे वापस एम्बेसी जाने लगे तो बीच रास्ते में यूक्रेन आर्मी ने उन्हें रोककर उन पर बंदूक तान दी। जब वे वापस एम्बेसी आए तो घुसने से मना कर दिया गया। एम्बेसी जबरन उन्हें शेल्टर होम से बाहर भेजने की कोशिश कर रही है।

माइनस 1 डिग्री में 40 किलोमीटर चला पैदल

भागलपुर के शुभम् पैदल की पोलैंड के लिए निकल पड़े। टरनोपिल से पोलैंड बॉर्डर की यात्रा शुभम् के लिए आसान नहीं थी। पोलैंड के लिए 40 किलोमीटर वे पैदल चले। शुभम् ने बताया कि जैसे ही पता चला कि यहां से पौलेंड की ओर निकलना है। सुबह 4:30 बजे से प्राइवेट गाड़ी से वह पोलैंड की ओर निकल पड़े। लेकिन, बार्डर से 40 किलोमीटर पहले से गाड़ियों की लंबी लाइन लगी थी। इस कारण गाड़ी वाले ने आगे जाने से मना कर दिया, इसलिए वे पैदल ही निकल गए।

पासपोर्ट गुम होने पर रोहतक का छात्र परेशान, बोला- अगर एंबेसी हमारे साथ ऐसा करेगी, तो कौन बचाएगा

यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे छात्रों के सामने एक और नई समस्या आ गई है। ज्यादातर के पासपोर्ट अब गुम हो चुके हैं। रोहतक के मोहित ने बताया है कि कीव में एयर स्ट्राइक से पहले ही वह और उनके कई दोस्त सूमी शहर में आ गए थे। पासपोर्ट गुम न हों, इसलिए उन्हें वहीं कीव में अपनी मेडीकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में छोड़ आए थे। अब वहां लगातार हमले हो रहे हैं, ऐसे में पता भी नहीं है कि उनके दस्तावेज या फिर हॉस्टल का भी वजूद बचा होगा या नहीं। वहां जाना खतरे से खाली नहीं होगा। मोहित ने बताया है कि पासपोर्ट गुम होने वाले छात्रों से एंबेसी बोल रही है कि शुल्क देकर एक फार्म भर दो, उसके बाद पुलिस में शिकायत दो फिर एंबेसी देखेगी कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। मोहित का कहना है कि ऐसे समय में एंबेसी का यह रवैया ठीक नहीं है। डिजीटल जमाना है। हम सभी छात्रों के पास दस्तावेंजों के नंबर और पीडीएफ हैं तो एंबेसी उन्हें चेक क्यों नहीं कर लेती।

MBBS का आखिरी साल था, फ्लाइट नहीं चढ़ पाया

रूस और यूक्रेन की लड़ाई में मूलरूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला 24 साल का अखिल यूक्रेन में फंसा हुआ है। बंकर में छिप कर वह अपनी जान बचा रहा है। वह इस समय यूक्रेन की राजधानी कीव में है। वह अपने परिवार से विडियो कॉल के जरिए बात भी नहीं कर पा रहा। रूसी सेना लगातार इस इलाके में धमाके कर रही है। ऐसे में उसके परिवार का मोहाली में बुरा हाल है। उसके भाई आर्यन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने भाई की सलामती के लिए कदम उठाने को कहा है। अखिल 6 साल पहले यूक्रेन गया था। वहां वह अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी कर रहा था। यह उसकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। 24 फरवरी को वह जैसे ही फ्लाइट पकड़कर भारत आने लगा, उसी वक्त वहां पर रूस ने हमला कर दिया। ऐसे में वह फ्लाइट नहीं चढ़ पाया।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ बस में सवार हुए स्टूडेंट

आजमगढ़ जिले के चेवार पश्चिम गांव के अरविंद सिंह के बेटा गंगेश्वर और सगड़ी तहसील के खतीबपुर गांव की रेनू यादव ने यूक्रेन से रोमनिया जाने के लिए बस में सवार हो गए हैं। बस में सवार होते ही छात्रों ने हर-हर महादेव का जयकारा किया। रेनू ने बताया कि शुक्रवार की रात यूक्रेन सरकार की सलाह पर बंकर में बिताई।

देवरिया की बेटी सृष्टि के पास 2 से 3 दिन का खाना बचा

रुद्रपुर क्षेत्र के मांगा कोडर गांव निवासी सृष्टि यादव पुत्री अमरेन्द्र यादव यूक्रेन में मेडिकल स्टूडेंट हैं। रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में सृष्टि भी वहां फंस गईं हैं। सृष्टि ने बताया- शहर के करीब ही बम धमाका हो रहा है। वे लोग तीन दिनों से फंसे पड़े हैं। यहां हम लोगों के पास दो से तीन दिन का ही खाना है। कैश की भी दिक्कत है। सभी दुकाने बन्द हैं। हम लोगो को जल्द से जल्द यहां से निकाला जाए।

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