दुष्कर्म के मामले में फंसाकर रुपये ऐंठ रहा मह‍िलाओं का गैंग

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गोरखपुर, पैसों की लालच में घिनौना काम कर रही महिलाओं के गैंग का मामला सामने आया है। जो लोगों को दुष्कर्म के मामले में फंसाकर रुपये ऐंठ रहा है।गिरोह की महिला के नाम से न्यायालय में दुष्कर्म का वाद दाखिल किया जाता है। फिर संबंधित व्यक्ति को फोन पर दावा दाखिल होने की सूचना देकर समझौते की पेशकश की जाती है। व्यक्ति ने रुपये दे दिए तो ठीक वरना मुकदमा दर्ज कराने के लिए न्यायालय में पैरवी तेज हो जाती है। पुलिस से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद गिरोह के सदस्य पुलिस बनकर पूछताछ का रुआब दिखाते हैैं। थाने से पता करने पर व्यक्ति को मामला सही मिलता है। अधिकांश मामलों में इतने में समझौता हो जाता है। इतने पर भी रुपये नहीं देने वाले के खिलाफ गैंग की महिला बयान दर्ज करा देती है और मुकदमा दर्ज करने का आदेश हो जाता है।

गैंग की महिलाएं मास्टर माइंड के इशारे पर तहरीर देती हैं और रुपये मिलते ही चुप हो जाती हैं। एक बार जो चंगुल में फंसा उससे तब तक वसूली होती है, जब तक वह मना न कर दे। गैंग में पेशेवर महिला-पुरुषों के अलावा कानून के जानकार भी हैं, जो पर्दे के पीछे से गिरोह को संचालित करते हैं।

दुष्‍कर्म का आरोप लगाने की धमकी देकर रुपये ऐंठने वाला गिरोह सक्रिय

मामला प्रकरण गीडा के 68 वर्षीय बुजुर्ग व्यापारी का है, जिन पर छह महीने में ही दुष्कर्म के पांच वाद दाखिल हो गए। अंजली, पानमती, शीला, सुशीला जैसे काल्पनिक नामों से दाखिल सभी वादों में आरोप एक ही था कि व्यापारी ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया। बेइज्जती और कानूनी झंझट से बचने के लिए व्यापारी ने जब तक रुपये दिए, तब तक मामला कचहरी से ही निपटता रहा और मना करने के बाद व्यापारी ही नहीं उनके दो बेटों पर भी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया।

गैंग में पेशेवर महिला-पुरुषों के अलावा कानून के जानकार भी शामिल

पुलिस ने विवेचना शुरू की तो शीला, सुशीला जैसे काल्पनिक नामों वाली महिलाएं दर्ज पते पर मिली ही नहीं। पुलिस ने दो मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट लगाकर व्यापारी और उनके बेटों को क्लीनचिट दे दी। व्यापारी और उनके बेटों पर अब पांचवा मुकदमा भी दर्ज हो गया है, जिसकी विवेचना जारी है। यह गिरोह ऐसे लोगों को निशाना बनाता है, जो उन्हें चुपचाप रकम दे सकते हैैं। व्यापारी अकेले नहीं हैं, इनके जैसे दर्जनों परिवार इस गिरोह के चंगुल में फंसकर तड़प रहे हैं।

अंजली और पानमती के नाम से नवंबर, 2020 में दो अलग-अलग वाद दाखिल हुए। दोनों में नौकरी दिलाने के नाम पर दुष्कर्म का आरोप था। गिरोह के संपर्क करने पर व्यापारी ने बेइज्जती के डर से समझौता कर लिया। रुपये मिलने के बाद चार पेशियों पर अंजली पहुंची न पानमती। नतीजा, दोनों वाद खारिज हो गए।

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