बढ़ रही ड्राई आई सिन्ड्रोम की समस्या, कंप्यूटर, स्मार्टफोन का अधिक उपयोग आंखों के लिए नुकसानदेह

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वाराणसी। इस डिजिटल समय में लोगों की जीवनशैली जहां आसान व लाभदायक हुई है वहीं इसके कुछ नुकसान भी देखने को मिल ​रहें हैं।कोरोना काल या उसके बाद लोगों में अनियमित खानपान, व्यायाम की कमी के साथ ही कंप्यूटर व स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से आंखों का पानी सुखने लगा है।

इसके कारण आंखों में सूखापन (ड्राई आई सिन्ड्रोम) की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में प्रतिदिन 10-15 मरीज ड्राइ आई के रोगी आ रहे हैं। इसमें से 4 से 6 रोगी एडवांस स्टेज में आ रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों में 50 फीसद 50 वर्ष से अधिक या महिलाएं हैं। वहीं एक चाैथाई रोगी युवा हैं, जो देर तक कंप्यूटर पर कार्य करने हैं आनलाइन अध्ययनरत हैं। इस रोग से ग्रसित होने वालों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप व गठिया के रोगी भी शामिल है।

आंसू हमारी आंखों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। सामान्य व्यक्ति एक मिनट में लगभग 10-15 बार पलकों को झपकाता है, जिससे आंसू की एक परत आंखों की उपरी सतह (कार्निया व कंजेक्टिवा) पर फैल जाती है। आंसू हमारी आंखों को नम व गीला रखता है, पलकों को चिकनाई प्रदान करता है। साथ ही संक्रमण से बचने के लिए आंसू में एंटी बैक्टेरियल तत्व जैसे: लैक्टोफेरीन, लाइसोसोम्स तथा इम्यूनोग्लोब्यूलिन प्रोटीन पाए जाते हैं। आंसू के नियमित बहाव व फैलाव से कार्निया (आंख की सफेद पुतली) स्वास्थ्य व पारदर्शी बना रहता है। आंसू के माध्यम से आंखों की साफ-सफाई होती है व धूल के कण बाहर निकल जाते हैं।

1- यूं तो ड्राई आई किसी भी आयु वर्ग के पुरुष व स्त्री में हो सकता है। परन्तु पचास वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में रजोनिवृत्ति (महावारी बन्द होने के) के पश्चात् हारमोन्स के बदलाव के कारण ज्‍यादा होता है।

2- कम्प्यूटर, लैपटॉप व मोबाइल स्क्रिन पर लम्बे समय तक एकटक (बिना पलक झपकाए) काम करने के कारण भी होता है।

3- शरीर के अन्य बीमारियों जैसे-थायराइड, मधुमेह, गठिया, त्वचा की टीबी (ल्यूपस) तथा पलकों के इन्फेक्शन व सूजन (स्क्वैमस ब्लिफराइटिस) आदि के रोगियों में ड्राई आई अधिक पाया जाता है।

4- कई प्रकार की दवाओं जैसे-दर्द निवारक गोली, गर्भ निरोधक गोली, उच्च रक्तचाप की ‘बिटा ब्लाकर दवाएं’, डाययूरेटिक्स, अवसाद दूर करने के वाली ‘एण्टी डिप्रेसेन्ट दवाएँ तथा मुहाँसे की दवा (आइसो ट्रेटी नियोन) आदि के सेवन से भी आँखों की आँसू सूख जाते हैं।

5- वायु प्रदूषण, लगातार ऐसी में रहने या शुष्क, गर्म वातावरण में रहने वालों को भी हो सकता है।

6- लम्बे समय से ‘‘कान्टैक्ट लेन्स’ का प्रयोग करने के कारण भी आँखों का सूखापन बढ़ जाता है।

7- मोतियाबिन्द व ग्लूकोमा (सम्बलबाई) की सर्जरी तथा लेसिक लेजर सर्जरी (चश्मा हटाने के लिए) के बाद भी ड्राई आई की समस्या बढ़ जाती है।

8- आंखों में लम्बे समय तक स्टेरायड ड्राप तथा परिरक्षक/प्रीजरवेटिव (बैन्जाइलकोनियम क्लोराइड तथा मक्र्यूरिक नाइट्रेट) युक्त आई ड्राप का प्रयोग करने से भी ड्राई आई सिन्ड्रोम हो जाता है।

9- जोग्रेन्स सिंड्रोम (जोड़ों का दर्द, शुष्क आँखें तथा शुष्क मुह/गला) के सभी रोगियों में ड्राई आई सिन्ड्रोम होता है।

10- कुछ रोगियों में ”ड्रग रिएक्‍सन के स्‍टीवेन्‍स जानसन सिन्‍ड्रोम के दुष्‍प्रभाव के कारण गम्‍भीर ड्राई आई डिजीज हो जाता है।

सवाल : ‘ड्राई आई डिजीज’ क्या होता है?

जवाब : हमारी आंखों के अंदर कंजेक्टिवा एवं पलकों में अश्रुग्रंथियां फैली होती हैं। इससे निरंतर आंसू बनते रहते हैं। आंसू की तीन परतें होती हैं। किसी भी कारण से यदि आंसू की मात्रा या गुणवत्ता में कमी आ जाए तो ड्राई आई उत्पन्न होता है। इसके मुख्‍य कारण आंसू का कम बनना या आंसू का अत्यधिक उत्सर्जित हो जाना है।

सवाल : ड्राई आई सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण क्या होते है?

जवाब : आंखों में थकान, भारीपन, जलन, सूखापन/गड़ना तथा लाल होना आदि। आंख से धुंधला दिखना तथा रोशनी को सहन नहीं कर पाना (फोटोफोबिया) भी अधिकांश रोगियों में पाया जाता है। समय से उचित इलाज नहीं करने पर एडवांस स्टेज ड्राई आई सिन्ड्रोम हो जाता है। आंखों की कन्जक्टिवा (कोमल झिल्ली) व कार्निया (स्वच्छ पटल) सूख जाती है तथा व्यक्ति पूरी तरह से अच्छा हो सकता है।

सवाल : बीएचयू में लगभग कितने ड्राई आई डिजीज के रोगी उपचार के लितए आ रहे हैं?

जवाब : वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 10-15 ड्राई आई के रोगी ईलाज हेतु आ रहे है। इसमें से 4-6 रोगी एडवांस स्टेज में जटिलताओं (कम्प्लीकेशन) के साथ रोशनी के स्पष्ट होने के बाद आते है। इलाज हेतु आने वाले 50 प्रतिशत ड्राई आई के रोगी उम्रदराज (50 वर्ष से अधिक) महिलाएं होती है तथा एक चौथायी रोगी युवा वर्ग जो देर तक कम्प्यूटर पर का कार्य करने वाले है या आनलाइन अध्ययन करने वाले होते है। कोरोना काल से पहले युवा वर्ग में कम ड्राई आई की शिकायत थी। ड्राई आई के ज्यादातर उम्रदराज मरीज मधुमेह, उच्चरक्तचाप व गठियां रोग से प्रभावित रहते है।

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