IND vs ENG 3rd ODI: अगर जीतनी है वनडे सीरीज तो टीम इंडिया को स्पिन में करने होंगे ये 2 बदलाव

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स्पोर्ट्स डेस्क. भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज पर अब निगाहें तीसरे मैच पर लग गई हैं. विशाल स्कोर का जिस तरह इंग्लैंड की टीम ने दोनों मैचों में पीछा किया है, वह टीम इंडिया के लिए खतरे की घंटी है. अगर उसे सीरीज पर कब्जा जमाना है तो स्पिन में उसे दो बदलाव पर सोचना होगा.

टेस्ट सीरीज आसानी से जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का आत्मविश्वास आसमानी बुलंदियों को छूने लगा था. फिर टी 20 सीरीज में 0-2 से पीछे होने के बाद भी जिस तरह से वापसी कर के जीत हासिल की. उसने भी यह भ्रांति फैला दी कि हम जब चाहें, जीत सकते हैं. इससे उत्साहित होकर 50 50 ओवरों के मैचों में प्रयोगों का सिलसिला शुरू कर दिया गया. पहला मैच हम खतरा झेलते हुए जीत भी गए. इसने भारतीय क्रिकेट के विचारकों को और भी बेफिक्र कर दिया. इंग्लैंड के खिलाफ प्रयोगों का सिलसिला जारी रहा. परिणाम मिला दूसरे एक दिवसीय मैच में भयंकर धुलाई हुई.

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इंग्लैंड 50 ओवरों के प्रारूप में आज विश्व विजेता के पद पर आसीन है. मामूली टीम उतार उसे बार बार नहीं हराया जा सकता. दूसरे मैच में 337 का लक्ष्य इंग्लैंड ने 6 ओवर और 3 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया. अच्छा हुआ कि भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में प्रसिद्ध कृष्णा की उपस्थिति दर्ज हो गई. अन्यथा यह पराजय और भी शर्मनाक हो सकती है. 140 किमी प्रति घंटे से 145 की रफ्तार हासिल करने वाला यह नवोदित तेज गेंदबाज सुनील गावस्कर और शोएब अख्तर को भी प्रभावित कर गया. ऊंचे कद के कारण उसकी गेंदें उछाल लेती हैं. और फिर यॉर्कर गेंदों का अचूक इस्तेमाल उसे उपयोगी तेज गेंदबाज साबित करता है. प्रसिद्ध कृष्णा के पिता अपने जमाने में कॉलेज के तेज गेंदबाज थे तो मां बॉस्केटबॉल खिलाडी. प्रसिद्ध कृष्णा ने पिता की राह पकडी. डेनिस लिली की एमआरएफ पेस अकादमी में अपने हुनर को तराशा. मैक्ग्रा जैसे गेंदबाज की सलाह और अपनी मेहनत के बल पर भारत के लिए खेलने का सपना पूरा कर सका. मुश्किल और नाजुक क्षणों में संतुलित दिमाग से गेंदबाजी करना उसकी प्रमुख खूबी है.

भारत की दूसरे मैच में दुर्दशा का कारण रहा स्पिनरों द्वारा विकेट न ले पाना. और बेहिसाब रन लुटाना. पावर प्ले के ओवरों के बाद मध्य ओवरों में कुलदीप यादव और क्रुणाल पांड्या न केवल विकेट लेने में नाकाम रहे बल्कि इतने रन दे दिए कि मैच पर से ही पकड छूट गई. यूं देखा जाए तो भारत के पास विकेट चटकाने वाले गेंदबाजों की कमी दिखाई दे रही है. बुमराह, शमी, ईशांत के बगैर तेज आक्रमण धारहीन है. अश्विन जडेजा के बिना स्पिन आक्रमण भी कमजोर लग रहा है. भारत को सोचना होगा कि अश्विन की वापसी टीम के लिए कितनी जरूरी है. जडेजा जरूर घायल हैं. पर अश्विन का दबाव मध्यक्रम में जरूरी है.

कुलदीप यादव की चाइनामैन, टॉप स्पिनर और गुगली बल्लेबाजों के लिए बनाए गए विकेटों पर असरहीन नजर आ रही है. फिर बेन स्टोक्स ने 55 गेंदों में 99 रन ठोककर और एक ही ओवर में 3 लगातार छक्के लगाकर उनके आत्मविश्वास का कचूमर निकाल दिया. तीसरे और निर्णायक मैच में उसे विश्राम देना ही मुनासिब होगा. स्पिनरों के खिलाफ बेन स्टोक्स और बेयरस्टॉ ने 117 गेंदों में बेरहमी से 175 रन ठोक दिए. वक्त बदल रहा है. उसी हिसाब से क्रिकेट का खेल भी बदल रहा है. एक वक्त था जब 337 का लक्ष्य असंभव की श्रेणी में आता था. आज इसे आसानी से पार किया जा रहा है. अब जरूरी है कि जीतना है तो नियमित अंतराल से विकेट लेते रहिए. कामचलाऊ गेंदबाज आपको मैच नहीं जिता सकते. अश्विन की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए. इंग्लैंड की टीम का आत्मविश्वास इस जीत से काफी बढ गया होगा. उन्हें अब ये भरोसा हो गया होगा कि वह भारतीय पिचों पर किसी भी लक्ष्य का पीछा किया जा सकता है.

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैचों व टी 20 से भारत का प्रदर्शन वर्तमान सीरीज में शानदार रहा है. इसी क्रम व लय को जारी रखने की जरूरत है. पर अपनी सबसे ताकतवर टीम को उतारने के बगैर यह संभव नही है. सामने टीम टक्कर की है. ऐसे में टक्कर भारी है. कडे मुकाबले के लिए भारत को कमर कसकर तैयार होना पडेगा.
ये लेखक के निजी विचार हैं.

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