Indian Idol 12: नेहा कक्कड़ के 5 लाख रुपये देने पर संतोष आनंद ने दी सफाई, कहा- मैं नहीं जानता नेहा ने पैसे क्यों दिये, मदद भी नहीं मांगी थी

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टेलीवीजन डेस्क. गुजरे जमाने के मशहूर गीतकार 81 साल के संतोष आनंद (Santosh Anand) ने हाल ही में सिंगिंग रियलटी शो इंडियन आइडल 12 (Indian Idol 12) में शिरकत की थी। जहां शो की जज नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने मशहूर गीतकार संतोष आनंद (Santosh Anand) को 5 लाख रुपए दिए थे।

जिसके बाद से ही मीडिया पर गीतकार को लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगी कि संतोष आनंद (Santosh Anand) मुफलिसी के दौर में हैं और उनके पास इलाज और घर चलाने तक के पैसे नहीं हैं जिसकी वजह से उन्हें इंडियन आइडल 12 (Indian Idol 12) में बुलाकर नेहा कक्कड़ (Neha Kakkar) ने उनकी मदद की है। गीतकार ने खुद इन खबरों का खंडन करते हुए सफाई दी है। मशहूर गीतकार संतोष आनंद (Santosh Anand) ने कहा कि एक कलाकार को इज्जत और सम्मान चाहिए। याद किया जाना अच्छा लगा लेकिन बाद में कुछ ऐसी बातें हुईं जो गलत हैं।

आर्थिक तंगी नहीं है- संतोष आनंद (Santosh Anand)

संतोष आनंद (Santosh Anand) ने आगे कहा, मेरा घर ठीक से चल रहा है। नेहा बहुत अच्छी इंसान हैं जब उन्होंने मुझे 5 लाख रुपए देने का ऐलान किया तो मैंने कहा, मैं नहीं ले सकता। मैं एक स्वाभिमानी आदमी हूं। मैंने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे और ना ही कभी मांगूगा। मैंने किसी से मदद नहीं मांगी। मैं कवि सम्मेलन में भाग लेता हूं और उससे पैसे कमाता हूं। मुझे कोई परेशानी नहीं है तो मैं क्यों मदद मांगूगा। मैं नहीं जानना कि नेहा ने मुझे ये गिफ्ट क्यों दिया। अगर वो ये ना कहती कि आप इसे अपनी पोती समझ के ले लीजिए तो मैं कभी नहीं लेता। और उसके बाद लोग ये सब बातें करने लगे जो सच नहीं है। स्टेज पर बुलाया, सम्मान दिया, बस यही था। सम्मान और मदद में फर्क है। मुझे मदद नहीं चाहिए।

व्हीलचेयर पर हैं संतोष आनंद (Santosh Anand)

संतोष (Santosh Anand) अब शारीरिक रूप से लाचार हैं और व्हील-चेयर पर हैं। शादी के दस साल बाद संतोष को एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने संकल्प रखा। 15 अक्टूबर 2014 को बेटे ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी थी।

ये हैं संतोष के लिखे मशहूर गीत

  • मुहब्बत है क्या चीज

  • इक प्यार का नगमा है

  • जिंदगी की ना टूटे लड़ी प्यर कर ले घड़ी दो घड़ी

  • मारा ठुमका बदल गई चाल मितवा

  • मेघा रे मेघा रे मत जा तू परदेश

  • मैं न भूलूंगा, इन रस्मों को इन कसमों

  • ओ रब्बा कोई तो बताए

  • आप चाहें तो हमको

  • जिनका घर हो अयोध्या जैसा

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