दर्शको को डराने के बजाय हंसा रही है सैफ अली खान की भूत पुलिस

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यह फिल्म भूत भगाने का दावा करने वाले दो भाइयों विभूति (सैफ अली खान) और चिरौंजी (अर्जुन कपूर) की कहानी है। उनका अपना खास तरह का वाहन हैं, जिसमें वे रहते हैं। इस वाहन पर उलट बाबा एंड संस लिखा है। हिंदी सिनेमा में हारर कामेडी जानर में फिल्ममेकर्स काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। हारर फिल्म ‘रागिनी एमएमएस’, साइकोलाजिकल थ्रिलर ‘फोबिया’ जैसी फिल्मों के बाद पवन कृपलानी ने अब हारर कामेडी फिल्म ‘भूत पुलिस’ का निर्देशन किया है।पवन कृपलानी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म की शुरुआत में अंधविश्वास की आड़ में होने वाली ठगी का प्रसंग है। उन्होंने भूत होने या न होने को लेकर कंफ्यूजन क्रिएट करने की कोशिश की है, लेकिन उसमें कामयाब नहीं हो पाए हैं। दो भाइयों को काल भैरव तांत्रिक घराने की सातवीं पीढ़ी बताने के बावजूद उनकी कहानी में कोई ठोस मुद्दा नहीं है।

दरअसल, उनके पिता बड़े तांत्रिक होते हैं, जबकि विभूति ढोंगी और पाखंडी है। वह अंधविश्वास की आड़ में पैसा कमाना चाहता है। भूत-प्रेत में उसका यकीन नहीं है, वहीं चिरौंजी उसके विपरीत स्वभाव का है। वह अपने पिता द्वारा दी गई तंत्र-मंत्र की किताब से तांत्रिक विद्या सीख कर उनकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहता है। उन्हें हिमाचल की खूबसूरत वादियों में एक चाय बागान से किशकंडी नामक भूत को भगाने के लिए बुलाया जाता है। इसी बागान में 27 साल पहले उनके पिता ने इस भूत को वश में किया था। इस बागान की मालकिन दो बहनें माया (यामी गौतम धर) और कनिका (जैक्लिन फर्नांडीज) हैं। क्या दोनों भाई अमीर से दिवालिया बनीं इन बहनों की मदद कर पाते हैं? क्या वे भूत को भगाने में सक्षम हो पाते हैं, जो सिर्फ रात में निकलता है। इन सवालों के जवाब फिल्म देखने पर मिलेंगे।

बता दें, कहानी में विरोधाभास है। गो कोरोना की तर्ज पर गो किशकंडी और नेपोटिज्म (भाई भतीजावाद) ने पूरे देश को बर्बाद कर दिया… जैसे संवाद हंसाते हैं। फिल्म में सैफ अली अलग शैली में बोलते हैं। उनका वह अंदाज लुभाता है। हालांकि उसमें वह एकरूपता कायम नहीं रख पाते हैं। यहां वह मसखरे ज्यादा लगते हैं। ढोंगी तांत्रिक के किरदार में वह ढलते हुए नहीं दिखते हैं। वहीं अर्जुन कपूर किरदार में सहज नहीं लगते। दोनों भाइयों के बचपन से एकसाथ रहने के बावजूद उनका उच्चारण समान न होना समझ से परे हैं।

हॉरर कामेडी फिल्मों की खासियत हास्य के साथ कहानी में छुपा रहस्य होता है। आगे होने वाले घटनाक्रमों को लेकर कौतूहल रहता है। यहां पर वैसा एहसास नहीं होता। जैक्लिन फर्नांडीज के किरदार का आप आसानी से पूर्वानुमान लगा लेते हैं। फिल्म का खास आकर्षण जॉनी लीवर की बेटी जैमी लीवर की कामेडी है। अपने पिता की तरह वह भी प्रतिभावान है। फिल्म में उनका हाउ इज द जोश डायलाग बोलना और आओ न… गाना गाते हुए सीन जरूर याद रह जाता है। बाकी जैक्लिन फर्नांडीज ग्लैमरस लगी हैं। यामी गौतम सीमित दृश्यों में अपने किरदार को निभा ले जाती हैं। राजपाल यादव और जावेद जाफरी कैमियो रोल में अपने चिरपरिचित अंदाज में हैं।

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