दिलचस्प है हरिवंश राय बच्चन के जन्म की कहानी, 30,000 रुपए में भांजे को बेच दिया था घर, की थीं दो शादियां

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27 नवंबर को मशहूर कवि हरिवंश राय बच्‍चन की बर्थ एनिवर्सरी है। साल 1907 में यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बाबू पट्टी गांव में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता लाला प्रताप नारायण श्रीवास्तव थे। हरिवंश राय बच्चन का जीवन काफी चुनौती भरा रहा। उनकी किताब मधुशाला बहुत फेमस है और कई भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ है। हरिवंश राय बच्‍चन से जुड़े कुछ रोचक किस्से जानिए…

यहां बना डॉ.बच्चन के पिता का आशियाना

हरिवंश राय के पिता लाला प्रताप नारायण श्रीवास्तव और मां सुरसती देवी प्रतापगढ़ जिले के बाबू पट्टी गांव के रहने वाले थे। सुरसती देवी को शुरू में 2 संतान हुई, लेकिन पैदा होते ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद दोनों एक पंडित से मिले। पंडित ने सुरसती देवी और लाला प्रताप को 3 बर्तन दिए और कहा कि इस बर्तन को लेकर अपने घर से दक्षिण की तरफ जाओ। जहां शाम हो जाए, वहीं रुक जाना। फिर वहीं घर बनवाकर हरिवंश पुराण सुनना तो संतान सुख मिलेगा। दोनों बर्तन लेकर गांव से पैदल चले और शाम तक करीब 54 किलोमीटर दूर इलाहाबाद के चक जीरो रोड पहुंचे और रुक गए। लाला प्रताप नारायण ने वहीं घर बनवा लिया और पत्‍नी सुरसती देवी के साथ रहने लगे।

कुछ दिनों बाद चक जीरो रोड में सुरसती देवी ने एक बेटी बिट्टनदेई को जन्‍म दिया। इसके बाद भगवानदेई हुईं। लगातार 2 बेटी होने से लाला प्रताप परेशान हो उठे, उन्‍हें वंश चलाने के लिए एक बेटा चाहिए था। इसके बाद दंपती ने पंडित के कहने के मुताबिक, जीरो रोड मकान में ही हरिवंश पुराण सुना, जिसके बाद हरिवंश राय बच्‍चन का जन्म हुआ। उसके बाद एक और बेटा शालिग्राम हुआ। इस तरह हरिवंश राय बच्चन कुल 6 भाई-बहन थे। कुछ समय बाद इनके पिता ने यमुना किनारे स्थित जमुना क्रिश्चियन कॉलेज के सामने गली में एक मकान बनाया। यहीं साल 1935 में हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला की रचना की।

भांजे को 30,000 में बेच दिया था मकान

साल 1984-85 में हरिवंश राय बच्चन ने अपने इस पैतृक आवास को सिर्फ 30,000 में भांजे रामचंद्र को बेच दिया था। लेकिन आज भी उनके बेटे अमिताभ और परिवार के सदस्य इस घर को देखने वाले आते हैं। रामचंद्र के 4 बेटों में बंटवारे के बाद मकान का तो जैसे अस्तित्व नहीं के बराबर रह गया। लेकिन डॉ. हरिवंश राय बच्चन के भांजे के बेटे अनूप रामचंदर ने उनके कमरे को आज भी पहले की तरह ही रखा है। उनकी यादगार चीजें संभाल कर रखी हैं।

हरिवंश राय ने गुस्से में कही ये बात, फिर बदले में मिले 101 रुपए

इलाहाबाद के चर्चित कवि यश मालवीय ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘पहली काव्य रचना ‘मधुशाला’ के जरिए बच्चन साहब नामी कवि बन गए थे। उन्होंने ही कवियों के लिए मानदेय की परिपाटी की शुरुआत करवाई। ‘पहले कवियों का सम्मेलन तो जरूर होता था, लेकिन उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता था। साल 1954 में इलाहाबाद के पुराने शहर जानसेनगंज में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें डॉ. हरिवंश राय बच्चन, गोपीकृष्ण गोपेश और उमाकांत मालवीय सरीखे कई लोकप्रिय कवि बुलाए गए थे। प्रोग्राम शाम को शुरू होना था। सभी कवि सम्मेलन में पहुंचे। हरिवंश राय बच्चन जी ने पहुंचते ही गुस्से में काव्य पाठ करने से मना कर दिया।

उनका कहना था-‘जब टेंट-माइक वाले को पैसे मिलते हैं तो कवि को क्यों नहीं? जबकि कवियों की वजह से ही महफिल सजती है, वरना कवि सम्मलेन का क्या मतलब? ‘उस दौरान बच्चन साहब की ‘मधुशाला’ से लेकर ‘मधुकलश’, ‘मधुबाला’ जैसी काव्य रचनाएं धूम मचा रही थी। उनकी बात मान ली गई।’

‘कवि सम्मेलन खत्म होने के बाद बच्चन साहब को आयोजक मंडल ने 101 रुपए दिए। वहीं, उनके दोस्त कवि गोपीकृष्ण को 51 रुपए और उमाकांत मालवीय को 21 रुपए मानदेय मिला।’

‘बच्चन साहब ने अपनी ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’,’बच्चे प्रत्याशा में होंगे’, ‘नीणों से झांक रहे होंगे’ और ‘पक्षियों पर भाता’ रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी थी।’

दो शादियां कीं

1926 में हरिवंश राय की शादी श्यामा से हुई। टीबी की लंबी बीमारी के बाद 1936 में श्यामा का निधन हो गया। 1941 में बच्चन ने तेजी सूरी से दूसरी शादी की।

गांधी परिवार से रहे करीबी संबंध

बच्चन परिवार के गांधी परिवार से करीबी संबंध रहे हैं। हरिवंश जी की पत्नी तेजी और इंदिरा गांधी की दोस्ती तब से थी जब इंदिरा गांधी की शादी भी नहीं हुई थी। इसके बाद दोनों परिवारों के बच्चों के बीच गहरी दोस्ती बनी रही। जब राजीव गांधी ने शादी नहीं की थी तो इटली से आकर सोनिया ने कुछ दिन बच्चन परिवार के साथ बिताए थे। शादी की कुछ रस्में बच्चन परिवार के घर से ही पूरी हुई थीं। दोनों परिवारों की दोस्ती ही थी कि जब ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ घायल होकर ब्रीच कैंडी अस्पताल में पड़े थे तब राजीव गांधी अमरीका से उन्हें देखने आए और इंदिरा गांधी दिल्ली से वहां पहुंचीं थीं।

महत्वपूर्ण उपलब्धियां

हरिवंश राय ने 1941 से 1952 तक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में इंग्लिश लिटरेचर पढ़ाया। साल 1955 में कैम्ब्रिज से वापस आने के बाद वे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त हुए। 1966 में वे राज्य सभा के सदस्य मनोनीत हुए। ‘दो चट्टानें’ के लिए 1968 में बच्चन को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। साहित्य में योगदान के लिए वे मशहूर सरस्वती सम्मान, उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से भी नवाजे गए। बच्चन को 1976 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 18 जनवरी 2003 को उनका निधन मुंबई में हुआ था।

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