जानिए दूसरे दलों के कितने MLA भाजपा के पाले में और कितनों पर है नजर..

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लखनऊ: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी दल जोड़-तोड़ कि सियासत में जुट गए है। एक तरफ समाजवादी पार्टी छोटे-छोटे दलों को साथ जोड़कर जातीय और क्षेत्रीय दोनों संतुलन बना रही हैं, जिससे जीत का समीकरण फिट हो जाए। वही सत्ताधारी भाजपा पिछली चुनावों में हारी हुई सीटों को इस बार जीतने के लिए नई रणनीति बना रही है।

भाजपा का फोकस वैसे तो उन सभी 78 सीटों पर है, जो वो 2017 के चुनाव में हार गई थी, लेकिन इनमें से भी करीब एक दर्जन ऐसी सीटें है जिसमें भाजपा का कभी खाता भी नही खुल पाया है। पार्टी इस बार इस परिपाटी को बदलने के लिए तमाम कोशिशें कर ही है। पार्टी ने बड़े रणनीतिकारों ने इस बार उस नामुमकिन को मुमकिन करने के लिए अब दूसरे दलों के विधायकों की मदद लेने जा रही है ।

सोनिया के गढ़ में भाजपा की सेंध
रायबरेली को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। लंबे समय से रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। सोनिया गांधी यहां से सांसद है। इसे गांधी परिवार का सीट कहा जाता है। लोकसभा के साथ ही यहां विधानसभा की सीटों पर भी कांग्रेस का दबदवा रहता है। यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 3 भाजपा, 2 कांग्रेस और 1 समाजवादी पार्टी के पास है। भाजपा इस बार यहां क्लीन स्वीप के लिए जो रणनीति बनाई है, उसके तहत कांग्रेस के दोनों विधायक भाजपा के पाले में खड़े होकर मैदान में उतरेंगे। साथ ही चर्चा सपा के विधायक मनोज पांडेय को लेकर भी गर्म है।

दूसरे दलों के विधायकों पर भाजपा की नजर

सबसे पहल बात हाल में ही भाजपा में शामिल हुई रायबरेली सदर सीट की कांग्रेस विधायक अदिति सिंह की। 1974 से इस सीट पर कांग्रेस का लंबे समय तक कब्जा रहा,1989 और 1991 में जनता दल के अशोक कुमार लगातार दो बार यहां से जीते। उसके बाद अदिति सिंह के पिता अखिलेश सिंह का इस सीट पर जैसे कब्जा हो गया। 2017 में पिता के बाद अदिति सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर 90 हजार वोटों से जीत दर्ज की।

वर्तमान में रायबरेली के हरचंदपुर से कांग्रेस के विधायक राकेश सिंह भाजपा का पक्ष लेने के लिए जाने जाते है। भाई भाजपा में आ चुके है और जल्द ही इनकी आने की चर्चा है। योगी के साथ उनकी फाइल फोटो।

अदिति के बाद कांग्रेस के एक और बागी राकेश सिंह की भी भाजपा में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है।रायबरेली के हरचंदपुर विधानसभा भी फिलहाल कांग्रेस के खाते में है। एमएलसी दिनेश सिंह के भाई राकेश सिंह यहां से विधायक है और भाजपा से उनकी नजदीकियां जग-जाहिर है। 2012 बनी इस सीट पर सपा ने कब्जा जमाया, लेकिन अगले चुना में ही यह कांग्रेस के खाते में आ गई। अब भाजपा इस सीट पर जीत के लिए राकेश सिंह को जल्दही पार्टी में शामिल करा सकती है।

सपा के किले को भेदने की रणनीति

मुलायम सिंह का गढ़ माने जाने वाले पूर्वांचल के आजमगढ़ से अखिलेश यादव सांसद है। यहां कि 10 विधानसभा सीटों में से 5 पर सपा, बसपा को 4 सीटें जबकि भाजपा के खाते में महज 1 सीट है। 2012 के विधानसभा में यहां भाजपा खाता भी नही खोल पाई थी। 10 में से 9 सीटों पर सपा ने कब्जा जमाया था, जबकि 1 सीट बसपा के खाते में थी। भाजपा की नजर इस बार इसी सपा के गढ़ पर है। भाजपा ने इस गढ़ में सेंघ लगाने के लिए सबसे सगड़ी विधानसभा से बसपा विधायक वंदना सिंह को पार्टी में शामिल कर लिया है। इस सीट पर कभी बसपा तो कभी सपा का जोर रहा है। इस बार वंदना सिह के जरिए भाजपा इस पर कब्जा जमाने की तैयारी में है। चर्चा है कि भाजपा आजमगढ़ में बड़ी सेंघ लगाने के लिए कुछ और सपा और बसपा विधायकों पर डोरे डाल रही है।

गाजीपुर के सपा विधायक भी पहले ही आ चुके है भाजपा के पाले में
इससे पहले गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा से दो बार के लागातर विधायक सुभाष पासी को भाजपा अपने खेमें में ले आई है। समाजवादी पार्टी के इस विधायक के बदौलत भाजपा पूर्वांचल में हारी हुई सीटों को इस बार जीत कर इतिहास बदलना चाहती है।

सपा के 4 MLC भी थाम चुके है भाजपा का दामन

भाजपा ने सपा को बड़ी चोट पहुंचाने की नियत से चार मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को भी पार्टी में शामिल कराया है। इसमें बलिया से रविशंकर सिंह पप्पू, गौतमबुद्ध नगर से नरेंद्र सिंह भाटी, गोरखपुर से सीपी चंद और झांसी से रमा निरंजन शामिल हैं। भाजपा इन चारों को शामिल करा कर क्षेत्रीय और जातीय गणित दोनों को साधने की कोशिश कर रही है।

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