लखनऊ- भजन संध्या से हुई लोक कला महोत्सव की शुरुआत, हस्तशिल्प और दस्तरखान बना आकर्षण का केन्द्र

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लखनऊ। लोक कला महोत्सव समिति की ओर से लक्ष्मण की नगरी लखनऊ में पहली बार भव्य लोक कला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वृहद महोत्सव का आयोजन अलीगंज के लोकप्रिय पोस्टल ग्राउंड में 12 से 21 फरवरी तक किया गया है। शुक्रवार 12 फरवरी को इसका उद्घाटन राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर संस्कार भारती के विभाग संयोजक हरीश कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य विशिष्ट जन उपस्थित रहे। गुप्त नवरात्र के कारण खासतौर से उद्घाटन समारोह में भजनों की मधुर संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोगों ने स्टॉल्स और झूलों का भी आनंद लिया।

लोक कला महोत्सव न्यास के अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव ने बताया कि इस महोत्सव में एक ही मंच पर देश भर के लोक नृत्यों का गुलदस्ता सजाया जाएगा। संयोजक मंडल में शामिल विनय दुबे ने बताया कि समाज में विशिष्ट योगदान देने वाली हस्तियों का सम्मान भी किया जाएगा। दोपहर में तरह-तरह की कला प्रतियोगिताएं भी होंगी। इसमें लखनऊ महोत्सव की तर्ज पर बड़े-बड़े झूले भी संचालित किये जा रहे हैं। स्टॉल्स पर देशभर से आया एक से बढ़कर एक हस्तशिल्प के साथ ही स्वादिष्ट खानपान, कपड़े, सजावटी सामान भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

दीपिका सिंह सूर्यवंशी के संयोजन में हुए मधुर भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें अंजली पटेल ने “मेरे कंठ बसो महारानी मां” भजन सुनाकर संध्या का मधुर आगाज किया। ऊर्जावान युवा गायिका प्रगति सिंह ने “राम का गुणगान करिये” भजन सुनाकर शाम को परवान चढ़ाया। उपशास्त्रीय भजन की कड़ी में गीतांजली साहू ने “काली कमली वाला मेरा श्याम” भजन सुनाकर प्रशंसा हासिल की। तबले पर श्याम और हारमोनियम पर पवन ने प्रभावी संगत दी। इस क्रम में शनिवार को लोक संगीत की प्रस्तुति होगी।

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