सचिन वझे की गिरफ्तारी पर शिवसेना का बड़ा हमला- वझे केंद्र और बीजेपी के निशाने पर थे…

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Mumbai. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वझे (Sachin Waze) की गिरफ़्तारी के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ शिवसेना का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिये बीजेपी और मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। सामना ने लिखा है कि ‘एनआईए’ का इस तरह से आना, ये पिछला हिसाब चुकता करने के लिए ही था। वझे व उनके सहयोगियों ने गोस्वामी को पकड़ा, उसके टीआरपी घोटाले का पर्दाफाश किया। इसके बदले में केंद्र ने वझे को पकड़कर दिखाया।

सामना ने लिखा है कि इस मामले की जांच चल ही रही थी कि केंद्र सरकार ने ‘एनआईए’ को जांच के लिए भेजा। इसकी इतनी जल्दी आवश्यकता नहीं थी। लेकिन महाराष्ट्र के किसी मामले में टांग अड़ाने का मौका मिले तो केंद्र की जांच एजेंसियां भला पीछे क्यों रहें? बीस जिलेटिन की छड़ें और कार मालिक की संदिग्ध मौत की जांच एनआईए ने अपने हाथ में लेकर तुरंत वझे को गिरफ्तार करने का कर्तव्य पूरा कर दिखाया। वझे की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी को जो आनंद मिला है, उसका वर्णन करने में शब्द कम पड़ जाएंगे।

अर्नब को किया था गिरफ्तार

सामना ने लिखा है कि कुछ महीने पहले इसी वझे ने रायगढ़ पुलिस की मदद से बीजेपी वालों के महंत अर्णब गोस्वामी को अन्वय नाईक आत्महत्या मामले में हथकड़ियां लगाई थीं। उस समय ये लोग गोस्वामी का नाम लेकर रो रहे थे और वाझे को श्राप दे रहे थे। ‘‘रुकिये, देख लेंगे, केंद्र में हमारी ही सत्ता है’’, ऐसा कह रहे थे, वह मौका अब साध लिया है। विपक्ष की सरकारों को अस्थिर या बदनाम करने के लिए किसी भी स्तर पर जाना, फर्जी मामले निर्माण करना, राज्य सरकार के अधिकारों पर अतिक्रमण करना, ऐसे प्रकार बेझिझक चल रहे हैं।

वझे बीजेपी और केंद्र के हिटलिस्ट पर थे

सामना ने लिखा है कि सुशांत मामले में मुंबई पुलिस ने बेहतरीन जांच की, फिर भी केंद्र ने सीबीआई को इस मामले में घुसाया, उस सीबीआई ने भी कौन से दीये जलाए? हाथ मलते रह गए। कंगना रनौत इस बेताल अभिनेत्री ने गैरकानूनी काम किए फिर भी केंद्र सरकार और बीजेपी वाले उसके समर्थन में खड़े रहे। जब 20 जिलेटिन छड़ों के मामले की जांच राज्य का आतंकवादी निरोधी दस्ता कर ही रहा था कि ‘एनआईए’ उसमें कूद पड़ी। अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार कर उसे जेल भेजने से वझे बीजेपी और केंद्र के हिटलिस्ट पर थे ही। मुंबई पुलिस की जांच पूरी होने तक केंद्रीय दस्ता रुकने को तैयार नहीं था।

पुलवामा की जांच एनआईए से क्यों नहीं

सामना ने लिखा है कि बीस जिलेटिन छड़ें मिलने जैसे मामले देशभर में रोज हो रहे हैं। कश्मीर घाटी में आज भी विस्फोटकों का जखीरा मिल रहा है, लेकिन यह एनआईए का दस्ता वहां गया क्या? पुलवामा में विस्फोटकों का जखीरा कहां से अंदर घुसाया गया और उस विस्फोट में अपने 40 जवानों की बलि कैसे गई? ये आज भी रहस्य ही है! नक्सली क्षेत्रों में तो बंदूक, विस्फोटकों के कारखाने ही बन गए हैं, वहां देशविरोधी षड्यंत्र शुरू हैं, लेकिन तुम्हारी वो जिलेटिन छाप एनआईए है कि क्या है, वो उन विस्फोटकों को सूंघने भी नहीं गए।

हर जांच के लिए सक्षम है मुंबई पुलिस

सामना ने लिखा है कि अंबानी अपने देश की एक ऊंची हस्ती हैं। उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की कमी होनी ही नहीं चाहिए। इसीलिए उनके घर के परिसर में मिली बीस जिलेटिन की छड़ें और उसके बाद हुई मनसुख हिरेन की मौत, ये दोनों मामले गंभीर हैं। लेकिन इस मामले की जांच मुंबई पुलिस नहीं कर पाएगी, यह केंद्र सरकार परस्पर कैसे निर्धारित कर सकती है? मुंबई बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपियों को फांसी पर लटकाने वाली मुंबई पुलिस है, उसी तरह ‘26/11’ आतंकवादी हमले में कसाब जैसों को जान की बाजी लगाकर पकड़ने और फांसी पर लटकानेवाला मुंबई-महाराष्ट्र का पुलिस दल है।

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