Maharashtra: सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद तनाव में आई ठाकरे सरकार, एक घंटे तक चली उद्धव और पवार की मीटिंग

0
121
Maharashtra news in hindi Thackeray government tensed after the arrest of Sachin Vaze Uddhav and Pawar's meeting
.

मुंबई. पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वझे (Sachin Waze) मामले में महाराष्ट्र सरकार खुद तनाव में आती दिख रही है। वहीं वझे मामले में सरकार के रवैये से एनसीपी चीफ शरद पवार भी नाखुश नजर आ रहे हैं। इस बात का अंदाजा एनसीपी के मुखिया और महाविकास अघाड़ी सरकार के संयोजक शरद पवार और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) के बीच वर्षा बंगले पर हुई एक घंटे लंबी बैठक से लगाया जा सकता है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार और पुलिस विभाग पर उठ रहे सवाल कहीं ना कहीं सरकार की मुश्किलें बढ़ाते हुए नज़र आ रहे हैं।

महाविकास अघाड़ी में फड़ी फुट

बीजेपी (BJP) प्रवक्ता और विधायक राम कदम ने सचिन बजे की गिरफ्तारी के बाद बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस गिरफ्तारी की वजह से महा विकास आघाडी सरकार में बड़ी फूट पड़ी है कदम ने कहा कि शिवसेना आखिर क्यों एक साधारण पुलिस अधिकारी को बचाने के पीछे जी जान से जुटी है आखिर वह कौन से राज हैं जिनको शिवसेना बाहर नहीं आने देना आना चाहती है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए कहा है कि महाराष्ट्र के पुलिस और ATS पूरी तरह से सक्षम थी इस पूरे मामले की जांच के लिए लेकिन केंद्र सरकार ने जबरन एनआईए को बीच में लाया है। सचिन वझे की गिरफ्तारी केंद्र सरकार ने बदले की कार्रवाई के रूप में की है लेकिन सच जल्द ही सबके सामने आएगा। इसके पहले भी सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच में सीबीआई को लाया गया था। हालांकि सीबीआई को भी उस मामले में कुछ खास नहीं मिला था और बाद में यह पता चला था कि मुंबई पुलिस की जांच बिल्कुल सही दिशा में थी।

सचिन वझे के नार्को टेस्ट की मांग

महाराष्ट्र (Maharashtra) बीजेपी के नेता और विधायक राम कदम (MLA Ram kadam) ने अब एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वझे के नार्को टेस्ट (Sachin Waze Narco Test) की मांग की है। रामकदम का कहना है कि इसे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया है कि जो अधिकारी पूरे षडयंत्र का प्रमुख था वही पूरे केस का जांच अधिकारी भी था। इससे पता चलता है महाराष्ट्र सरकार यह सबकुछ जानबूझकर करवा रही थी। क्या महाराष्ट्र सरकार कुछ बड़े नामों को बचाना चाहती थी?

.