मैन्‍युफैक्‍चर्र्ड गुड्स की कीमतों में हुआ इजाफा

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नई दिल्‍ली, अगस्त में फिर से थोक महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। यह जुलाई के 11.16 फीसद के मुकाबले 11.39 फीसद रहा है। इसका मुख्‍य कारण मैन्‍युफैक्‍चर्र्ड गुड्स की कीमतों में इजाफा है।CRCL के एमडी और CEO डॉ. डीआरई रेड्डी के मुताबिक WPI Inflation लगातार 5वें महीने डबल डिजिट में है। इसका कारण तेल और प्‍याज की कीमतों में इजाफा है। हालांकि खाने की चीजें कुछ सस्‍ती हुई हैं। इसके बावजूद अगस्‍त में WPI Inflation 0.41 फीसद ज्‍यादा आया है। कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के मुताबिक गैर खाद्य चीजों, मिनरल ऑयल, क्रूड ऑयल, प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल, कपड़ा, रसायनिक उत्‍पाद के दाम बढ़ने के कारण अगस्‍त में WPI Inflation बढ़ गया।

बताया जा रहा है कि फूड इनफ्लेशन में गिरावट का कारण राज्‍यों में एक-एक कर Unlocking की प्रक्रिया और अच्‍छा मॉनसून रहा है। Unlocking की प्रक्रिया और Vaccination जैसे-जैसे बढ़ेगा, वैसे ही WPI भी नीचे आएगा।

बता दें कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के अनंतिम आंकड़े देश भर में चुनी हुई मैन्‍युफैक्‍चरिंग इकाइयों से प्राप्त आंकड़ों से लिए जाते हैं और हर महीने की 14 तारीख (या अगले कार्य दिवस) को जारी होते हैं।

इसमें जुलाई, 2020 की (-0.25%) की तुलना में जुलाई, 2021 में मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 11.16 प्रतिशत (अनंतिम) रही। जुलाई 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर का कारण मुख्य रूप से कच्चे पेट्रोलियम, खनिज तेल, मूल धातु, जैसे निर्मित उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कपड़ा और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बीते साल के इसी महीने की तुलना में बढ़ोतरी रही।

WPI Inflation से एक दिन पहले retail inflation के अगस्त के रेट आए थे। इसमें यह मामूली घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इससे पिछले महीने जुलाई में 5.59 प्रतिशत पर थी। वहीं 1 साल पहले अगस्त में यह 6.69 प्रतिशत पर थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अगस्त में 3.11 प्रतिशत रही जो कि जुलाई में 3.96 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक ने अगस्त में अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखा था। केंद्रीय बैंक अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पर फैसले के लिए मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है।

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में यह 5.9 प्रतिशत, तीसरी में 5.3 प्रतिशत और चौथी में 5.8 प्रतिशत रहेगी। वहीं, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 5.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया।

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