फ्लोर टेस्ट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों से मिलने का मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विधायकों से मिलना उचित नहीं होगा। कोर्ट  ने रजिस्ट्रार जनरल को भी बागी विधायकों से मिलने के लिए अनुमति देने से इन्कार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को सुबह 10.30 बजे होगी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में फ्लोर टेस्ट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कांग्रेस के 22 बागी विधायकों की ओर से वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि बागी विधायक किसी कांग्रेसी नेता से नहीं मिलना चाहते। उन्हें इसे लेकर बाध्य करने के लिए कोई कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि बागी विधायक संविधान के तहत हर सजा भुगतने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे किसी कांग्रेसी नेता से नहीं मिलना चाहते। उन्होने कहा कि विचारधारा के कारण इस्तीफा दे दिया गया, कोर्ट उसकी पेचीदगियों में नहीं जा सकता, स्पीकर इस्तीफे पर अनिश्चित काल के लिए नहीं टाल सकते।

दिग्विजय सिंह ने बागी विधायकों से मिलने के लिए दायर की याचिका

इसी  बीच दिग्विजय सिंह ने कर्नाटक हाईकोर्ट में मध्य प्रदेश के बागी विधायकों से मिलने के लिए याचिका दायर की है। साथ ही उन्होंने कहा कि भूख-हड़ताल को खत्म करने का फैसला तबतक नहीं लेंगे जबतक सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का कोई फैसला नहीं आ जाता। बता दें कि दिग्विजय आज ही सुबह बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरु पहुंचे। यहां विधायकों से मुलाकात  की अनुमित न मिलने पर वे धरने पर बैठ गए। इसके बाद हिरासत में लिए जाने के बाद वे पुलिस स्टेशन में भूख-हड़ताल पर बैठ गए। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

फ्लोर टेस्ट खाली सीटों पर उप-चुनाव के बाद हो

कांग्रेस चाहती है कि मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट खाली सीटों पर उप-चुनाव के बाद हो। समाचार एजेंसी पीटीआइ के अनुसार याचिका पर सुनवाई के दौरान पार्टी ने राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव तक स्थगित करने की मांग की। कांग्रेस विधायकों की ओर से वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि अगर इस दौरान तक कमलनाथ सरकार रहती है तो आसमान टूट के गिर नहीं जाएगा। बता दें कि मध्य प्रदेश में तुरंत फ्लोर टेस्ट कराने को लेकर भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने याचिका दायर की है।