वाशिंगटन. कोरोना से अदृश्‍य जंग लड़ रही दुनिया के लिए एक अच्‍छी खबर है। दुनिया के सबसे तेज कंप्‍यूटर ने इस तरह के केमिकल्‍स की पहचान की है, जो कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में सक्षम हैं। इन केमिकल्‍स की पहचान के बाद जानलेवा कोरोना के वैक्‍सीन का रास्‍ता खुल सकता है। दरअसल, कोरोना ने विश्‍वभर के वैज्ञानिकों के सामने ऐसी चुनौती पेश की है जिसका अभी तक कोई तोड़ नहीं मिल सका है। 

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना आज दुनिया के लगभग हर कोने में पहुंच चुका है। इस वायरस का तेजी से बढ़ता प्रसार विश्‍व समुदाय के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। इस बीमारी से लड़ने की दिशा में अब एक महत्‍वपूर्ण सफलता मिली है। एआई से लैस आईबीएम के सुपर कंप्‍यूटर समिट ने इसतरह के रसायनों की पहचान कर ली है, जो कोरोना को रोकने में सक्षम हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इस परीक्षण के दौरान सुपर कंप्‍यूटर समिट ने हजारों परीक्षण किए। इसमें से 77 इसतरह के रसायनों की पहचान की गई जो कोरोना के वायरस के प्रसार को रोकने में सक्षम हैं। इस खोज के बाद अब कोरोना के सबसे प्रभावी वैक्‍सीन का रास्‍ता साफ होता नजर आ रहा है। यह प्रयोग ओक रजि नैशनल लेब्रोटरी ने किया है। सुपर कंप्‍यूटर समिट का निर्माण दुनिया की समस्‍याओं को सुलझाने के लिए ही किया गया है। अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने वर्ष 2014 में समिट पर काम शुरू किया था। यह सुपर कंप्‍यूटर 200 पेटाफ्लॉप की गणना करने में सक्षम है। यह सबसे तेज लैपटॉप से 10 लाख गुना ज्‍यादा शक्तिशाली है।