ओडीओपी ने दिलाई सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल को अंतर्राष्ट्रीय पहचान- सीएम योगी

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लखनऊ. एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना से जुड़ने के बाद यूपी के काला नमक चावल को एक नई पहचान मिली है। उच्च, श्रेणी की मार्केटिंग व ब्रांडिंग की बदौलत आज काला नमक चावल की खुशबू सिद्धार्थनगर से निकल कर देश और दुनिया में महक रही है। तकनीक के जरिए काला नमक चावल की उत्पाौदन क्षमता को बढ़ाया गया और लागत को कम किया गया। इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। यह बात मुख्यजमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनपद सिद्धार्थनगर में काला नमक महोत्सकव का अपने आवाास से वर्चुअली शुभारंभ करते हुए कहीं। इस मौके पर स्वा स्य्पद मंत्री जय प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश चंद्र द्विवेदी व डुमरियागंज के सांसद जगदिम्ब्का पाल मौजूद रहे।

प्रदेश सरकार की ओर से झांसी के स्ट्रा बेरी और लखनऊ के गुड़ महोत्स व की तर्ज पर सिद्धार्थनगर के राजकीय इंटर कालेज, नौगढ़ में तीन दिवसीय काला नमक महोत्स व का आयोजन किया गया है। मालूम हो कि कालानमक चावल सिद्धार्थनगर का ओडीओपी है।महोत्सव में काला नमक चावल से बने स्वाकदिष्टा भोजन का मजा भी लोग ले सकेंगे। कार्यक्रम का सम्बोीधित करते हुए मुख्यममंत्री ने किसानों का बधाई देते हुए कहा कि सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में काला नमक चावल की उत्पाोदन क्षमता को लेकर नए शोध किए जा रहे है। भविष्य में इसकी उपज और गुणवत्ता और सुधरेगी। इसका लाभ किसानों को मिलेगा।

2600 साल पुराना है कालानमक का इतिहास

काला नमक का इतिहास करीब 26 व 27 सौ साल पुराना है। मुख्यपमंत्री ने कहा कि पहले सिद्धार्थनगर में जब काला नमक चावल का उत्पासदन होता था, तो आबादी कम थी और कृषि क्षेत्रफल अधिक। इससे काला नमक चावल के उत्पाादन में लागत अधिक आती थी। जनपद सिद्धार्थनगर व आसपास क्षेत्रों के 22 हजार हेक्टेेयर में फसल पैदा की जाती थी। नुकसान के चलते इसकी पैदावार कम होती गई। 2017 से पहले काला नमक का उत्पासदन 22 सौ हेक्टेपयर तक पहुंच गया। वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया और काला नमक की वैराइटी में व्याकपक सुधार किया गया। इसकी उत्पाुदन क्षमता को बढ़ाया गया। इसके बाद काला नमक को ओडीओपी योजना से जोड़ा गया। अब अकेले सिद्धार्थनगर में ही लगभग 5 हजार हेक्टे यर में काला नमक चावल धान का उत्पाअदन किया जा रहा है।

खुशबू और स्वाद के साथ पौष्टिक तत्वों से भी भरपूर

सीएम ने कहा कि 160 से कम दिनों में फसल तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने काफी कार्य किया। काला नमक चावल का पौधा लम्बा होने से बरसात या तेज हवा के झोंके से गिर जाता था। इससे किसानों को काफी नुकसान होता था। वैज्ञानिकों ने तकनीक के जरिए पौधे की लम्बाझई को कम किया और उत्पािदन क्षमता बढ़ाने में सफलता हासिल की। काला नमक चावल में खुशबू के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में पोषक तत्वत आयरन, ओमेगा-3, जिंक, आयरन ओमेगा 6 पाए जाते हैं। इसी कारण देश व दुनिया के अंदर काला नमक चावल की लोकप्रियता बड़ी है। इससे किसानों की आमदनी में भी बढ़ोत्तंरी हुई है। खासकर पिछले तीन से चार सालों में।

नवाचार से इतिहास रच रहे किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्रन मोदी ने छत पर स्ट्रा बेरी का उत्पांदन करने वाली झांसी के एक किसान की बेटी का जिक्र किया था। बुंदेलखंड की धरती हमेशा से सूखे की चपेट में रहती है लेकिन यहां पर कैसे परिवर्तन लाया जा सकता है। यह उस बेटी ने करके दिखा दिया। आज किसान की वह बेटी डेढ़ एकड़ में स्ट्रारबेरी का उत्पा।दन करके 42 लाख रुपए का प्रोडक्श़न कर चुकी है। ऐसे ही सुलतानपुर के किसान गया प्रसाद मुरारी सिंह ने ड्रैगन फ्रूट का उत्पापदन कर इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की उत्पाददन क्षमता को बढ़ाने और लागत को कम करने का प्रयास सरकार कर रही है। जिन किसानों ने फसल उत्पािदन में नजीर पेश की उनको समाज के सामने लाने का काम भी सरकार ने किया है। सीएम ने कहा कि चंदौली के किसानों प्रगतिशील किसानों ने ब्लैमक राइस चावल की पैदावार शुरू की है। जो किसान मणिपुर से लेकर आए हैं। यह चावल पूरी तरह से काला होता है। मुझे सपा के एक एमएलसी ने इसकी खीर खाने का आग्रह किया था। वाकई वह बेहद स्वादिष्ट थी। वहां के किसान काफी अच्छीए आमदनी कमा रहे हैं। सिद्धार्थनगर के काला नमक की ऊपरी सतह ही सिर्फ काली होती है जबकि चावल सफेद होता है।

कालानमक की ब्रांडिंग में जनप्रतिनिधि करें मदद

सीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधयों को भी काला नमक चावल की ब्रांडिंग में सहयोग देना चाहिए। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। काला नमक चावल में विटामिन व प्रोटीन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पोषक तत्वस पाए जाते हैं। जो एक नए ब्रांड के रूप में इसे अन्तार्राष्ट्रीथय मंच उपलब्धा करा रहा है। मधुमेह जैसी बीमारियों में भी यह लाभदायक है। हमें इस पर व्याइपक शोध करके इसे आगे बढ़ाना चाहिए। अयोध्याध के आचार्य नरेन्द्रम देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वमविद्यालय समेत गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, व महाराजगंज के कृषि वैज्ञानिकों ने इस दिशा में उत्कृ ष्ट कार्य किया है। कृषि वैज्ञानिकों को स्थानीय किसानों के साथ संवाद कर उसकी उत्पाधदन क्षमता बढ़ाने का काम करना चाहिए।

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