भारत के इतिहास में पहली बार किसी महिला को दी जाएगी फांसी, जुर्म ऐसा की जानकर आपकी रूह कांप जाएगी…

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लखनऊ. भारत के इतिहास में पहली बार किसी महिला को फांसी पर लटकाने की तैयारी शुरू हो गयी है। यह फांसी उत्तर प्रदेश के इकलौते महिला फांसीघर मथुरा जेल में दी जाएगी। फांसी कब होगी? इसकी अभी कोई निश्चित तारीख नहीं है।
13 साल पहले अमरोहा की रहने वाली शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। 15 फरवरी को उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है।

परिवार के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला था

अमरोहा के बाबनखेड़ी गांव निवासी शबनम ने 15 अप्रैल 2018 को अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस अहमद, उसकी पत्नी अंजुम, भतीजी राबिया और भाई राशिद के अलावा अनीस के दस माह के बेटे अर्श की हत्या कर दी थी। सभी को पहले दवा देकर बेहोश किया गया और इसके बाद अर्श को छोड़कर अन्य को कुल्हाड़ी से काट डाला था। शबनम ने अर्श का गला दबाकर उसे मारा था। जांच में पता चला था कि शबनम गर्भवती थी, लेकिन परिवार वाले सलीम से उसकी शादी के लिए तैयार नहीं थे। इसी वजह से शबनम ने प्रेमी सलीम से मिलकर पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया था।

2008 में मुरादाबाद जिले में था बाबनखेड़ी

अमरोहा जनपद के अंदर आने वाला बाबनखेड़ी गांव 2008 में मुरादाबाद जनपद में आता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अमरोहा जिला घोषित किया था। उसके बाद बाबनखेड़ी अमरोहा जिले में चला गया और बाबनखेड़ी हत्याकांड की सुनवाई अमरोहा जिले की ट्रायल कोर्ट में सुनवाई होने लगी थी। 15 जुलाई 2010 को ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से भी उसे फांसी की सजा हुई। शबनम ने अपने बेटे का हवाला देते हुए माफी की मांग की थी। 2015 सितंबर माह में UP के गवर्नर राम नाईक ने भी शबनम की दया याचिका याचिका खारिज कर दी थी।

जेल में ही शबनम ने बेटे को दिया था जन्म

जेल में रहने के दौरान शबनम ने एक बेटे को 14 दिसंबर 2008 को जन्म दिया था। उसका बेटा जेल में उसके साथ ही रहा था। 15 जुलाई 2015 में उसका बेटा जेल से बाहर आया, इसके बाद शबनम ने अपने बेटे को उस्मान सैफी और उसकी पत्नी सौंप दिया था। उस्मान सैफी जो शबनम का कॉलेज फ्रेंड है जो बुलंदशहर में पत्रकार है। शबनम ने बेटे को सौंपने से पहले उनके सामने दो शर्तें रखी थी। उसके बेटे को कभी भी उसके गांव में न ले जाया जाए, क्योंकि वहां उसकी जान को खतरा है और दूसरी शर्त ये थी कि उसके बेटे का नाम बदल दिया जाए।

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