Som Pradosh Vrat 2021: सोम प्रदोष व्रत से बढ़ता है वैभव, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि

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Som Pradosh Vrat 2021
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धर्म डेस्क. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का खास महत्त्व है. एकादशी की तरह प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) भी माह में दो बार रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) मास की हर त्रयोदशी को रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन भगवान भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है. जब प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) सोमवार को होता है तब यह सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat) कहलाता है. जून माह का पहला प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) सोमवार के दिन पड़ रहा है.

सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat) विधि

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. यही प्रदोष काल होता है. प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) में व्यक्ति को सुबह प्रातः कल उठकर स्नानादि करके भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने के लिए पुनः स्नान करके बैठें. पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. अब उन्हें चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, नैवेद्य, बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, धतूरा, श्वेत पुष्प, मौसमी फल, शहद, गाय का दूध और गंगा जल अर्पित करें. महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं. मां पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करना बेहद शुभ होता है.

Som Pradosh Vrat के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) की पूजा प्रदोष काल में ही करना शुभ माना जाता है. आज 07 जून को प्रदोष काल शाम 07 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर रात 09 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. व्रतधारी इस शुभ मुहूर्त में ही भगवान शिव की पूजा करें.

Som Pradosh Vrat से बढ़ता है वैभव

धार्मिक मान्यता है कि जब चंद्रमा बुरा प्रभाव दे रहा हो तो, व्यक्ति को प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) के दिन भगवान शिव और पार्वती की श्रद्धा पूर्वक पूजा करनी चाहिए तथा उन्हें सोम प्रदोष के व्रत को पूरी निष्ठा और नियम पूर्वक रखना चाहिए.

मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में शांति बनी रहेगी और इच्छानुसार फल की प्राप्ति होगी. भगवान शिव और पार्वती की कृपा से घर में धन, वैभव और समृद्धि बढ़ेगी. वहीं, यह व्रत निःसंतान दम्पत्तियों को अवश्य रखना चाहिए. मान्यता है कि यह व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है.

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