महामारी की वजह से बिगड़े आर्थिक हालात, अर्थव्यवस्था को उबारने की चुनौती

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डेस्क न्यूज : महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था काफी अस्त—व्यस्त व खराब स्थिति को पहुॅच गई है, जिससे निपटने ​के लिए प्रयास किये जा रहे है। महामारी की दूसरी लहर से बदहाल अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए सरकार ने हाल में छह लाख अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया है।इसके तहत स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्रों व छोटे कर्जदारों के लिए कर्ज गारंटी योजना के अलावा आपात कर्ज सुविधा योजना (ईसीएलजीएस) की रकम तीन लाख करोड़ से बढ़ा कर साढ़े चार लाख करोड़ रुपए कर दी गई है। सरकार ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का दायरा भी बढ़ाया है।

दूसरी लहर के कारण अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। इसलिए एक और राहत पैकेज की जरूरत महसूस की जा रही थी। स्थिति यह है कि देश में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की आमदनी में भारी गिरावट के कारण क्रय शक्ति घट गई है। बड़ी संख्या में लोगों की बचत खत्म हो गई है और वे कर्ज लेकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं। महंगाई और बेरोजगारी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। महामारी की वजह से बिगड़े आर्थिक हालात से बैंकों का एनपीए बढ़ गया है।

बताया जा रहा है कि खुदरा परिसंपत्तियों और छोटे उद्यमों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। निजी निवेश की गति भी सुस्त हो गई है। कुल उपभोग, व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और सेवाओं पर बड़ा असर दिखाई दिया है। गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपने पूर्व निर्धारित साढ़े दस फीसद की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटा कर साढ़े नौ फीसद कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) ने भी आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को घटा कर 7.9 फीसद कर दिया है, जो पहले 10.4 फीसद था। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक टीकाकरण में युद्ध स्तर पर तेजी लाने से महामारी के दुष्प्रभाव से निकलने में मदद मिलेगी, साथ ही मांग, उपभोग और निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था में जान आएगी।

इस बार दूसरी लहर के बीच पिछले साल जैसी देशव्यापी कठोर पूर्णबंदी नहीं लगाई गई, इसलिए विनिर्माण क्षेत्र पर ज्यादा बुरा असर नहीं पड़ा। आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआइ) मई 2021 में घट कर 50.8 पर आ गया, जो अप्रैल में 55.5 अंक पर था। इस दौरान कंपनियों के पास नया काम और उत्पादन पिछले दस महीनों में सबसे कम रहा। जबकि पिछले साल मई में विनिर्माण पीएमआइ घट कर 30.8 अंक रह गया था।

वैश्विक वित्तीय संगठनों व क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्टों पर नजर डालें तो पाते हैं कि इन रिपोर्टों में भी विकास दर में कमी आने के स्पष्ट संकेत हैं। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की वृद्धि दर के अनुमान को घटा कर 9.6 फीसद कर दिया है, जो पहले 13.9 फीसद था। रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक संकेतक बता रहे हैं कि दूसरी लहर ने अप्रैल और मई में भारत की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। दूसरी लहर के कारण 2021 के वृद्धि दर अनुमान को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। रिपोर्ट में कोविड टीकाकरण की निम्न दर को लेकर चिंता जताई गई है।

 

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