क्रिकेट से संन्यास लेकर बने थे टीवी पर्सनालिटी, कई उतार-चढ़ाव से भरी राजनीतिक पारी अब भी जारी

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अमृतसर: पटियाला का वो लड़का जो अपने पिता की ख्वाहिश पूरी करना चाहता था। उस युवा ने महज 20 साल की उम्र में बल्ला थाम लिया। फिर क्रिकेट की पिच पर ऐसी शानदार बल्लेबाजी की, कि साथी खिलाड़ी उसे ‘सिक्सर सिद्धू’ बोलने लगे। इतना ही नहीं फील्डिंग करने में ऐसी महारत हासिल की, कि लोगों ने नाम दिया जोंटी सिंह। हम बात कर रहे है नवजोत सिंह सिद्धू की जिसने खेल का मैदान हो या राजनीति का दंगल, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हमेशा ही जोरदार पटखनी दी है। उनके अब तक के करियर की बात करें तो वे न सिर्फ एक अच्छे क्रिकेटर रहे बल्कि, क्रिकेट के साथ- साथ टेलीविजन में भी अपना काफी टाइम दे चुके हैं। इसके अलावा वे पेशे से पर्यटन मंत्री, पंजाब राज्य के सांस्कृतिक मामलें और संग्रहालय मंत्री भी रह चुके हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू का शुरूआती सफर-

नवजोत सिंह सिद्धू के पिता सरदार भगवंत सिंह क्रिकेटर थे। वह चाहते थे कि उनका बेटा भी उनकी तरह खिलाड़ी बने। अपने पिता की इस इच्छा को पूरी करने के लिए सिद्धू ने 1983 में एक क्रिकेटर के तौर पर क्रिकेट की दुनिया में डेब्यू किया। सिद्धू साल 1983 से 1999 तक टीम इंडिया का हिस्सा रहे। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला। सिद्धू ने कुल 51 टेस्ट मैच और 136 वनडे मैच खेले हैं। उन्होंने टेस्ट में 3202 और वनडे में 4413 रन बनाए हैं। करीब 17 साल क्रिकेट की दुनिया में रहने के बाद, 1999 में क्रिकेट से संन्यास लिया। क्रिकेट का सफर खत्म होने के बाद उन्होंने कमेंट्री में भी हाथ आजमाया।

छोटे पर्दे पर भी छाये रहे सिद्धू-

नवजोत सिंह सिद्धू ने 17 साल तक क्रिकेट खेलने के बाद टेलीविजन के छोटे पर्दे पर भी अपने हुनर की छाप छोड़ी है। टीवी पर कमेंट्री करने के अलावा नवजोत रियलिटी शो बिग बॉस का भी हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा वह कपिल शर्मा के कॉमेडी शो समेत कई कॉमेडी शो में लंबे समय तक जज की भूमिका में रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने फिल्मों में भी हुनर दिखाया है। बता दें उन्होंने ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘एबीसीडी 2’ के कैमियो किया साथ ही पंजाबी फिल्म ‘मेरा पिंड’ में भी एक्टिंग की है।

नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक सफर-

नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना राजनीतिक सफर साल 2004 में शुरू किया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने 2004 में सिद्धू को भाजपा में शामिल किया था। बता दें सिद्धू भाजपा में रहने के दौरान भी और उसे छोड़ने के बाद भी हमेशा जेटली को ही अपना सियासी गुरु मानते रहे। साल 2004 में ही सिद्धू ने पहली बार अमृतसर लोकसभा सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता रघुनंदन लाल भाटिया को 1,09,532 वोटों से हरा दिया था।

जब सिद्धू पर लगा हत्या का आरोप-

रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2006 में सिद्धू पर हत्या के आरोप लगने के बाद उन्होंने लोकसभा से अपना इस्तीफा दे दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव लड़ने की इजाजत मिलने के बाद साल 2007 में अमृतसर से ही सिद्धू ने उप-चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता सुरिंदर सिंगला को हराया था। जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार ने अप्रैल 2016 में सिद्धू को राज्यसभा में नामांकित किया, पर उन्होंने भाजपा से साल 2016 को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।

साल 2017 में बदली पार्टी

साल 2017 में सिद्धू कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए, जिसके बाद उसी साल पंजाब विधानसभा चुनावों में पूर्वी अमृतसर से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 42,809 मतों के अंतर से चुनाव जीता। बता दें नवजोत सिंह सिद्धू अभी पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रेसिडेंट है।

सिद्धू ही नहीं पत्नी भी है राजनीति में एक्टिव-

नवजोत सिंह सिद्धू के निजी जीवन की बात करें तो उनके माता पिता के अलावा उनकी पत्नी और दो बच्चे है। उनकी पत्नी का नाम नवजोत कौर सिधु है वे एक डॉ है। लेकिन वह भी राजनीति में एक्टिव हैं और साथ ही वे पंजाब विधानसभा की पूर्व सदस्य भी रह चुकी हैं। उनके दो बच्चे है। उनके बेटे का नाम करण है और बेटी का नाम राबिया है। जानकारी के मुताबिक राबिया फैशन की शौक़ीन है। फैशन डिजाइनिंग के लिए विदेश गईं थी।

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