आगरा- दरोगा प्रशांत यादव के कातिल पर 50 हजार का इनाम, पुलिस की 10 टीमें तलाश में जुटीं

0
170
UP Agra Daroga SI Prashant Yadav Murder Case Update 10 teams of police started in search of killer Vishwanath
.

क्राइम डेस्क. उत्तर प्रदेश के आगरा में बुधवार को टोल प्लाजा चौकी में तैनात SI प्रशांत यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे दो सगे भाइयों के बीच विवाद को सुलझाने पहुंचे थे। लेकिन छोटे भाई ने उन्हें गोली मार दी। फिलहाल आरोपी पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम घोषित किया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 10 टीमें दबिश दे रही हैं।

ADG राजीव कृष्ण का कहना है कि अभी शहीद का अंतिम संस्कार और आरोपी की जल्द गिरफ्तारी उनकी प्राथमिकता है। इस प्रकरण की विभागीय जांच होगी। यदि पुलिस की लापरवाही या संलिप्तता की बात उजागर होती है तो थानेदार और अन्य पर भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस वालों ने हल्के में लिया था विवाद

खंदौली के गांव नोहर्रा में विजय सिंह ने अपने खेतों का बंटवारा कर दिया था। दस बीघा बड़े बेटे शिवनाथ और इतनी ही भूमि विश्वनाथ को देने के साथ ही सात बीघा खेती अपने पास रखी थी। विजय का छोटा बेटा विश्वनाथ मां के साथ रहता था, पर पिता की खेती बंटाई पर करता था। इस बार पिता ने शिवनाथ को खेत बंटाई पर दे दिया था। बुधवार को खेत से आलू निकालने के दौरान विश्वनाथ और उसकी मां ने हंगामा किया था और सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। यहां पुलिस ने सख्ती बरतने के स्थान पर बिना कोई कार्रवाई किए डांट-डपट कर मामला खत्म करवा दिया था।

इसके बाद शाम को जब विश्वनाथ ने फिर हंगामा किया तो शिवनाथ द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। इसके बाद दरोगा प्रशांत यादव और सिपाही चंद्रसेन वहां पहुंचे थे। विश्वनाथ को पकड़ने के दौरान उसने दरोगा पर गोली चला दी और गले में गोली लगने से दरोगा की मौके पर मौत हो गई। अगर दिन में ही मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की जाती तो शाम को यह कांड नहीं हो पाता।

सनकी है आरोपी, बात-बात पर निकाल लेता है तमंचा

ग्रामीणों की मानें तो विश्वनाथ सनकी किस्म का है और वह तमंचा लेकर घूमता था। घटना के समय भी वो तमंचा लहराकर मजदूरों को धमका रहा था। विश्वनाथ के हाथ में पिस्टल देखकर SI प्रशांत ने उसे दबोचने की कोशिश की। आरोपी के भागने पर प्रशांत ने उसका पीछा किया। विश्ननाथ ने फायरिंग की। एक गोली प्रशांत की गर्दन में लगी। लहूलुहान हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

शहीद दरोगा के परिजन अभी भी हैं नाखुश

दरोगा प्रशांत यादव को राज्य सरकार ने शहीद का दर्जा देते हुए उनके परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एक सदस्य को नौकरी देने का भी ऐलान किया गया है। लेकिन परिजनों का कहना है कि आर्थिक सहायता कम है। परिवार को दो नौकरी दी जाए। दरोगा पर अपनी बहनों और चाचा के परिवार की बहनों के साथ अपनी पत्नी व बच्चे की जिम्मेदारी थी। इसलिए परिजन 50 लाख और नौकरी की मदद को नाकाफी मान रहे हैं। परिजनों को आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है।

.