मिशन 2022: राम की नगरी से चुनावी बिगुल फूंकेगी BSP, बनाई है ये रणनीति

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लखनऊ. अगले साल 2022 में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट ने राजनीतिक दलों की सरगर्मी बढ़ा दी है। सत्ता दल हो या फिर विपक्ष सभी राजनीतिक पार्टियां इस चुनाव को फतह करने की कवायद में जुट गई हैं। इसी कड़ी में 23 जुलाई को अयोध्या में बसपा ब्राह्मण सम्मेलन करके भगवान राम की धरती से विधानसभा चुनाव के तैयारी का शंखनाद करने जा रही है

जहां एक तरफ सूबे की योगी सरकार विकास के साथ साथ राम मन्दिर और अयोध्या के सहारे दुबारा सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है. तो वहीं दूसरी तरफ बसपा 2007 में कारगर हुई दलित-ब्राह्मण गठजोड़ का ताना-बाना बुनने की जुगत कर रही है. जिसकी मुख्य वजह है प्रदेश में करीब 14 प्रतिशत ब्राह्मण और 24 प्रतिशत दलित मतदाताओं का होना. ऐसे में बीएसपी की नजर इन 38 प्रतिशत मतदाताओं पर है, जो किसी भी पार्टी के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकते हैं.

जातीय समीकरण में उलझी सूबे की सियासत में दलित मतदाताओं को बसपा का आधार वोट माना जाता है लिहाजा ऐसी परिस्थिति में चुनावी महाभारत फतह करने के लिए बसपा दलित वोट बैंक के साथ साथ ब्राह्मण मतदाताओं को पूरक वोट बैंक के रूप में डोरे डालने की कोशिश में है.

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