UP: अवैध तरीके से हो रही है ई—रिक्शो में चार्जिंग

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बलिया। शहर में तीन हजार से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इसके बैटरी चार्ज के लिए शहर में एक भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं हैं, लेेकिन बिजली विभाग ने 12 से अधिक स्थान ऐसे चिह्नित किये हैं, जहां पर अवैध तरीके से बाईपास कटिया के जरिये बैटरी चार्जिंग की सुविधा दी जा रही है। ई-रिक्शा की बैटरी चार्ज करने के लिये बिजली की संगठित चोरी से विभाग को हर महीने करीब 39 लाख का चूना लग रहा है। मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। इंजीनियर कायदे से जांच करें तो ऐसे अवैध ठिकाने बहुत मिल जाएंगे। ऐसे गिराेह ने बाईपास केबिल के जरिये दस से 15 ई-रिक्शा को चार्ज करने की सुविधा दी है। दिन भर चालक ई-रिक्शा चलाते हैं, रात को वे उनके ठिकाने पर रिक्शा चार्जिंग को छोड़ देते हैं। ऐसे करीब 90 प्रतिशत रिक्शा चार्ज होते हैं। चार्ज के एवज में मनमाना शुल्क भी वसूला जा रहा है। 50 से 60 रुपये प्रति रिक्शा धनराशि वसूली जा रही है। सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही अपने घरों में चार्ज करते हैं, लेकिन उन्हें भी नियमत: घरेलू के बजाय कामर्शियल कनेक्शन लेना चाहिये। उधर सिर्फ एक रिक्शा कटियामारी से चार्ज करने के चलते बिजली विभाग को 44 रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। इस तरह शहर में औसतन रोजाना 1.32 लाख से अधिक बिजली चोरी हो रही है। साथ ही संबंधित क्षेत्र के ट्रांसफार्मर का भी लोड बढ़ रहा है।

ऐसे हो रहा नुकसान

एक ई रिक्शा में लगे चार बड़े बैटरी को रोज चार्ज करने में औसतन पांच से सात घंटे लगते हैं, जिसमें करीब आठ यूनिट बिजली खर्च होती है। बैटरी चार्ज करने के लिये बिजली विभाग के अधिकारी कामर्शियल चार्ज लेते हैं। कामर्शियल बिजली का रेट 7.50 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि घरेलू बिजली का रेट 5.50 रुपये प्रति यूनिट है। बिजली विभाग के इंजीनियरों की मानें तो एक माह में 39 लाख से अधिक का राजस्व नुकसान हो रहा है।

ई-रिक्शा चार्जिंग पूरी तरह से कामर्शियल में आता है। घरेलू बिजली से चार्ज करना कानूनी अपराध है। इसकी गोपनीय पड़ताल करायी जा रही है। ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई की जायेगी।

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