यूपी- मुस्लिम महिलाओं ने खेली होली, बोलीं- नफरत मिटाएं दा दिलवा से…कट्टरपंथियन के छाती पर अबकी होलिका जली…

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वाराणसी. धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी (Kashi) में हर वर्ष की भांति इस बार भी होली (Holi) का रंग चढ़ता नजर आ रहा है. कोरोना वायरस के खौफ के बावजूद वाराणसी (Varanasi) शहर में शुक्रवार को मुस्लिम महिलाओं ने जमकर होली खेली।

इस दौरान मुस्लिम महिलाओं ने होली के गीत गाए “नफरत मिटाएं दा दिलवा से, मिलो होली का त्यौहार मनावा। हमरे देशवा का त्यौहार वा, विदेशवा तक मनी, कट्टरपंथियन के छाती पर अबकी होलिका जली। इन महिलाओं का मानना है कि धर्म चाहे जो हो,लेकिन सांस्कृतिक रूप से हम एक ही है।

मुस्लिम महिलाओं ने स्वरचित गीत गाया

मुस्लिम महिलाओं ने PM मोदी के तस्वीर की आरती उतारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार की तस्वीर पर गुलाल लगाकर होली खेली। मुस्लिम महिलाओं ने भगवान श्रीराम की तस्वीर पर गुलाल लगाकर होली कार्यक्रम की शुरुआत की और सुभाष मंदिर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति पर गुलाल लगाया। विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं ने दुनिया के देशों को यह संदेश दिया कि धर्म बदलने से संस्कृति नहीं बदलती संस्कृति से ही देश और व्यक्ति की पहचान होती है।

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि त्योहार किसी धर्म का नहीं बल्कि देशों की संस्कृति के संदेशवाहक होते हैं। धर्म बदलने से संस्कृति कभी नहीं बदलती। हमारे पूर्वजों के खून में होली के रंगों की लालिमा है। राम और कृष्ण से ही डीएनए हमारा मिलता है। जब हमारे पूर्वजों ने होली के रंगों के साथ पीढ़ी दर पीढ़ी गुजारी तो कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर आज हमें दूर नहीं होना चाहिए।

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