क्या यूपी की सियासत में होगा कोई बड़ा फेरबदल? आखिर क्यों उड़ी है BJP दिग्गजों की नींद

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं उसके दो साल बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यूपी की सियासत में कोई नया मोड़ देखने को मिल सकता है। लेकिन क्या ये सियासी घमासान 2022 को टारगेट करके हो रहा है या फिर 2024 की केंद्रीय राजनीति का प्लॉट तैयार हो रहा है. राजनीति में राजनेता दूर की सोचकर निर्णय लेते हैं. और अचानक से कोई विजयी की भूमिका में सामने आ जाता है.

सियासी चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश में चुनावी वर्ष की शुरुआत हो चुकी है. जीत कैसे मिले इसपर काम चल रहा है. रणनीतिक तैयारियों के तहत बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और यूपी प्रभारी राधामोहन सिंह की रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व के पास पहुंच चुकी है. रिपोर्ट मिलने के बाद राधामोहन सिंह दोबारा लखनऊ का दौरा करते हैं.

राजभवन में मुलाकात के पीछे गहरे मायने

राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मिलते हैं फिर बाहर आकर बताते हैं कि शिष्टाचार मुलाकात थी. उसी दिन वे विधानसभा अध्यक्ष से भी मिलते हैं और उसे पुराने संबंधों के आधार पर की गई मुलाकात बताते हैं. विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित कहते हैं कि दोनों नेताओं में राष्ट्रवाद और प्राचीन इतिहास पर बात हुई है. एक दिन में दो संवैधानिक पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों से मुलाकात के गहरे मायने हो सकते हैं. क्या पार्टी सदन में किसी विषम परिस्थिति में आने वाली है.

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