कोविड न्यूज अपडेट। इलाहाबाद हाईकोर्ट का दवाओं की कालाबाजारी पर कड़ा रूख। जिलों के डीएम और अफसर किये गये तलब

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DESK NEWS। कोरोना काल में चल रही दवाओ की कालाबाजारी को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलों डीएम और अन्य जिम्मेदार अफसरों को जमकर फटकार लगाई।

हाईकोर्ट ने कालाबाजारी  में जब्त  जीवन रक्षक दवाओं, रेमडेसिविर इंजेक्शन,आक्सीजन सिलिंडर,आक्सीमीटर को उपयोग में लाने पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को तत्काल निर्णय लेने का निर्देश दिया है। पुलिस को एक हफ्ते के भीतर DM से संपर्क कर इसका आदेश प्राप्त करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान ऑनलाइन पेश हुए लखनऊ के जिलाधिकारी ने अदालत को बताया कि अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। सन हास्पिटल ने गैरजिम्मदाराना रवैय्या अख्त्यिार करते हुए कार्य किया है तो वही दूसरे समर्थ हास्पिटल को कोरोना मरीज भर्ती करने का अधिकार नहीं है। दोनों पर कार्रवाई की जा रही है।

कोर्ट ने DM की सराहना की और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही मेरठ के DM को हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। वह जिले में आक्सीजन की उपलब्धता तक नहीं बता पाए। कोर्ट ने कहा डीएम ने कोई जांच ही नहीं की। 11 मई को जांच रिपोर्ट के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया।

इस दौरान अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया प्रदेश मे आक्सीजन प्लांट में उत्पादन शुरू हो गया है। मांग और आपूर्ति में काफी सुधार हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में ऑक्सीजन का कोई संकट नहीं है। मांग और आपूर्ति की मामूली दिक्कत थी लेकिन इतनी नहीं कि इसकी कमी से किसी की जान चली जाए।

प्रदेश में अब पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। सीएमओ व डीएम के रेफरल लेटर की व्यवस्था हटा ली गयी है। केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में वकील ने बताया कि आक्सीजन की मांग और आपूर्ति के गैप को काफी कम किया गया है। व्यवस्था में निरंतर सुधार जारी है।

 

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